आरक्षण पर फिर तेज हुई बहस, भागवत के बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के रुख से बढ़ी चर्चा

देश में एक बार फिर आरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब के बाद अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर भी आरक्षण नीति में बदलाव को लेकर विभिन्न तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं।
मोहन भागवत ने क्या कहा?
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि जिन लोगों ने आरक्षण का लाभ लेकर सामाजिक और आर्थिक रूप से पर्याप्त प्रगति कर ली है, उन्हें स्वेच्छा से पीछे हटने पर विचार करना चाहिए ताकि उसी समुदाय के अन्य जरूरतमंद लोगों को भी इसका लाभ मिल सके। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि आरक्षण कब तक जारी रहना चाहिए। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उनके मूल सिद्धांतों का पालन किया जाए तो इस विषय पर किसी तरह का भ्रम नहीं रहेगा। भागवत ने यह भी कहा कि आरक्षित वर्गों के भीतर उप-वर्गीकरण की मांग इसलिए उठ रही है ताकि आरक्षण का लाभ समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने SC, ST, OBC और EWS आरक्षण के भीतर आय के आधार पर सब-कोटा बनाने की मांग का विरोध किया है। सरकार ने अदालत से कहा कि अनुसूचित जाति और जनजाति को मिलने वाला आरक्षण आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया है। केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि OBC पर लागू ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत SC और ST पर लागू नहीं होता। सरकार के अनुसार, आरक्षण से जुड़ी सूचियों में बदलाव करने का अधिकार केवल संसद के पास है और इस प्रकार के नीतिगत निर्णय न्यायपालिका के बजाय विधायिका और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसी कारण केंद्र सरकार ने संबंधित याचिका को खारिज करने की मांग भी की है।



