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योग दिवस : भारत से निकली परंपरा, दुनिया ने अपनाई जीवनशैली

5000 साल पुरानी भारतीय परंपरा का दुनिया में बढ़ा प्रभाव

नई दिल्ली। हर साल 21 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग(yoga) दिवस मनाया जाता है। हजारों वर्षों पुरानी भारतीय योग परंपरा आज केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन और शारीरिक फिटनेस का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। भारत से शुरू हुई यह परंपरा अब 175 से अधिक देशों तक पहुंच चुकी है और करोड़ों लोग इसे अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना चुके हैं।

बड़े स्तर पर आयोजित होते हैं योग के कार्यक्रम

योग(yoga) को भारतीय संस्कृति और दर्शन की अमूल्य धरोहर माना जाता है। संस्कृत में योग का अर्थ शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में योग ने दुनियाभर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि आज कई देशों में बड़े स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का रखा था प्रस्ताव

योग(yoga) को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में भारत की पहल अहम रही है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे बड़ी संख्या में सदस्य देशों का समर्थन मिला। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मान्यता दी और वर्ष 2015 में पहली बार इसे वैश्विक स्तर पर मनाया गया।

आज न्यूयॉर्क, लंदन, पेरिस, टोक्यो और बीजिंग समेत दुनिया के कई प्रमुख शहरों में योग दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विभिन्न देशों में भारतीय दूतावास भी योग से जुड़े आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और स्वस्थ जीवनशैली के संदेश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

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