छत्तीसगढ़ में वंदे भारत ट्रेन जैसे भगवा रंग की 240 ई-बसें चलाने की तैयारी, रायपुर समेत 4 शहरों को मिलेगी सौगात

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों के रंग और डिजाइन का कट-आउट भी जारी किया गया है। इन ई-बसों का रंग वंदे भारत ट्रेनों जैसा भगवा हो सकता है। इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा, बसों के रूट की जानकारी और शहरों में परिवहन सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।
नवा रायपुर में 11 अक्टूबर को नवरात्र के प्रथम दिवस उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की मौजूदगी में ई-बस संचालन को लेकर कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता चारों नगर निकायों और चयनित एजेंसी चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के बीच हुआ। इस कार्यक्रम को प्रदेश के शहरी परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रायपुर समेत चार शहरों में चलेंगी 240 इलेक्ट्रिक बसें
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रस्तावित है। इन शहरों में बढ़ती आबादी और रोजाना आवागमन करने वाले लोगों की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से लोगों को आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प मिलेगा। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और शहरों में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बसों का वास्तविक संचालन कब शुरू होगा, इसकी तारीख की जानकारी संबंधित घोषणा में नहीं दी गई है।
वंदे भारत ट्रेन जैसा हो सकता है भगवा रंग
इन इलेक्ट्रिक बसों की चर्चा इनके संभावित रंग को लेकर भी हो रही है। जानकारी के अनुसार, बसों का रंग वंदे भारत ट्रेनों जैसा भगवा हो सकता है। समझौता कार्यक्रम के दौरान चारों नगरीय निकायों में चलने वाली बसों के रंग और डिजाइन के कट-आउट का विमोचन किया गया।
बसों के रंग और डिजाइन को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि, भगवा रंग को लेकर उपलब्ध जानकारी में इसे संभावित रंग बताया गया है। इसलिए अंतिम रंग और डिजाइन की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी से ही होगी।
हर बस में लगाए जाएंगे छह कैमरे
नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। प्रत्येक बस में छह कैमरे लगाने का प्रावधान रखा गया है। इससे बसों के भीतर निगरानी रखने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, यात्रियों को मोबाइल ऐप के माध्यम से बसों के रूट की जानकारी मिल सकेगी। इससे लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि बस किस मार्ग पर चल रही है और उनके लिए कौन-सा रूट उपयोगी हो सकता है। डिजिटल माध्यम से रूट की जानकारी उपलब्ध होने पर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद
शहरों में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ वायु प्रदूषण भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शहरी परिवहन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इलेक्ट्रिक बसें सीधे तौर पर पेट्रोल या डीजल नहीं जलातीं, इसलिए इनके इस्तेमाल से वाहन संचालन के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। इसका वास्तविक लाभ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि बसों का संचालन किस तरह होता है और उन्हें चार्ज करने के लिए बिजली की व्यवस्था कैसे की जाती है।
यदि लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल करते हैं, तो सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे शहरों में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावना बढ़ेगी।
चार्जिंग स्टेशन और डिपो बनाने पर जोर
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू करने के लिए केवल बसें उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होगा। इनके लिए चार्जिंग स्टेशन, बस डिपो, बस स्टॉप और रखरखाव केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करना भी जरूरी है।
नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और परिवहन की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन का आधुनिकीकरण आवश्यक है। उन्होंने योजना को सफल बनाने के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाओं के विकास, विभागीय समन्वय और निर्धारित समय-सीमा में काम पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
चार्जिंग व्यवस्था तैयार होने से बसों को नियमित रूप से चलाने में मदद मिलेगी। वहीं, रखरखाव केंद्रों के माध्यम से बसों की तकनीकी देखरेख और मरम्मत की व्यवस्था की जा सकेगी। बस स्टॉप और डिपो का विकास यात्रियों के लिए बेहतर परिवहन नेटवर्क तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद
240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के साथ इससे जुड़ी आधारभूत सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। चार्जिंग स्टेशन, डिपो और रखरखाव केंद्रों के विकास से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
बसों के संचालन, तकनीकी रखरखाव और संबंधित सेवाओं में कर्मचारियों की जरूरत हो सकती है। हालांकि, रोजगार के अवसरों की वास्तविक संख्या और भर्ती से जुड़ी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं की गई है।
कार्यक्रम में ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत आयोजित कंसेशन एग्रीमेंट कार्यक्रम में रायपुर की महापौर मीनल चौबे, बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी, कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत, दुर्ग की महापौर अलका बाघमार और बिरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन मौजूद रहे।
कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल और चार्टर्ड स्पीड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज गांधी भी शामिल हुए।
अब संचालन शुरू होने का इंतजार
छत्तीसगढ़ के चार शहरों में 240 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की दिशा में कंसेशन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर एक महत्वपूर्ण कदम है। अब इन बसों को सड़कों पर उतारने के लिए चार्जिंग स्टेशन, डिपो, बस स्टॉप और रखरखाव केंद्र जैसी सुविधाओं को तैयार करना होगा।
भगवा रंग की संभावित पहचान, छह कैमरों की सुरक्षा व्यवस्था और मोबाइल ऐप से रूट की जानकारी जैसी सुविधाएं इस योजना को खास बनाती हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित शहरों में आधारभूत सुविधाओं का विकास कितनी तेजी से पूरा होता है और यात्रियों को इन बसों की सुविधा कब से मिलने लगती है।



