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ChhattisgarhRaipur

छत्तीसगढ़ में कल से खुलेंगी 7 रेत खदानें, तीन साल का एक्सटेंशन; धूल और बदहाल सड़कों से ग्रामीण परेशान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेत खनन एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। खनन पर प्रतिबंध के बाद अब सात पुरानी रेत खदानों में दोबारा काम शुरू करने की तैयारी है। इन खदानों को तीन साल का एक्सटेंशन दिया गया है। हालांकि, खदानों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की परेशानियां अब भी बरकरार हैं। सड़कों पर उड़ती धूल, भारी वाहनों की आवाजाही और बदहाल रास्तों के बीच सवाल उठ रहा है कि खनन शुरू होने के साथ लोगों को राहत देने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं।

एक तरफ पुरानी खदानों को दोबारा संचालन की अनुमति मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ वर्ष 2026 की नई रेत खदानों की प्रक्रिया और पर्यावरणीय मंजूरियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण उन्हें धूल और खराब सड़कों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में खनन दोबारा शुरू होने से उनकी मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।

10 जून से बंद था खनन, अब फिर शुरू होगी गतिविधि

जानकारी के मुताबिक, 10 जून से प्रतिबंध के बाद रेत खनन बंद था। अब सात पुरानी खदानों में दोबारा खनन शुरू करने की तैयारी है। इनमें कुरूद, लखना, कुम्हारी, पारागांव, हरदीडीह, चिखली-ए और चिखली-बी खदानें शामिल हैं। इन खदानों को तीन साल का एक्सटेंशन दिए जाने की जानकारी खनिज विभाग की ओर से दी गई है।

इसके अलावा चार अन्य खदानों के संचालन का भी उल्लेख किया गया है। इनमें दो पुरानी खदानें मोहमेला-ए और कागदेही तथा दो नई खदानें चंपाझर-ए और चंपाझर-बी शामिल हैं। हालांकि, सभी खदानों के संचालन की तारीख और अनुमति की स्थिति संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से अलग-अलग स्पष्ट होना जरूरी है।

रेत खनन शुरू होने से निर्माण कार्यों के लिए रेत की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन खनन के साथ पर्यावरणीय नियमों का पालन और स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान भी जरूरी है।

तीन साल का एक्सटेंशन, नई खदानों की मंजूरी पर सवाल

रेत खदानों को तीन साल का एक्सटेंशन दिए जाने के बाद खनन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर पुरानी खदानों का संचालन दोबारा शुरू करने की तैयारी है, तो दूसरी ओर वर्ष 2026 की नई खदानों को लेकर एनओसी की स्थिति चर्चा में है।

खनन गतिविधियों के संचालन के लिए संबंधित अनुमतियां और पर्यावरणीय नियमों का पालन जरूरी है। ऐसे में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि किन खदानों को कौन-कौन सी मंजूरी मिली है और किनकी प्रक्रिया अभी बाकी है।

इस संबंध में सहायक खनिज अधिकारी उमेश भार्गव ने बताया कि सभी ने अनुमति ले ली है। वहीं, खनिज विभाग के उप संचालक राजेश मालवे के मुताबिक, फिलहाल सात खदानें शुरू होंगी और इन्हें तीन साल का एक्सटेंशन दिया गया है। उन्होंने बताया कि बाद में कुछ नई खदानें भी संचालित होंगी और उन्हें पर्यावरण विभाग से एनओसी मिल चुकी है।

इन बयानों के बीच खदानवार मंजूरी की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि महत्वपूर्ण है, ताकि पुरानी और नई खदानों के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

धूल और खराब सड़कों से ग्रामीण परेशान

रेत खदानों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या धूल और भारी वाहनों की आवाजाही बताई जा रही है। खनन और परिवहन के दौरान सड़कों पर धूल उड़ने से आसपास के इलाकों में परेशानी होती है। वहीं, भारी वाहनों के लगातार गुजरने से सड़कों की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

ग्रामीणों की शिकायत है कि खदानों से जुड़े परिवहन मार्गों पर धूल कम करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते। नियमों के अनुसार, जहां आवश्यक हो वहां पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के दूसरे उपाय किए जाने चाहिए। लेकिन इन उपायों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे में खनन दोबारा शुरू होने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि परिवहन मार्गों पर नियमित पानी का छिड़काव हो, सड़कों की स्थिति पर निगरानी रखी जाए और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जाए।

पर्यावरण विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

खनन गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों की शिकायतों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि धूल नियंत्रण, परिवहन व्यवस्था और पर्यावरणीय नियमों के पालन की निगरानी कितनी प्रभावी है।

इस मामले में रायपुर के क्षेत्रीय अधिकारी पीके राबड़े ने बताया कि विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। जहां प्रदूषण की स्थिति या पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, वहां कार्रवाई की जाती है।

विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण किए जाने की बात कही गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर धूल और खराब सड़कों की समस्या का समाधान कितना हुआ है, यह जानना भी जरूरी है। इसके लिए निरीक्षण रिपोर्ट, कार्रवाई का विवरण और खदानों के आसपास किए गए धूल नियंत्रण के उपायों की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

खनन शुरू होने से पहले ग्रामीणों को राहत मिलेगी?

रेत खनन से निर्माण कार्यों को गति मिल सकती है और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होती हैं। लेकिन इसके साथ आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, आवागमन और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।

अब सात पुरानी खदानों में खनन दोबारा शुरू होने की तैयारी है। ऐसे में निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने, धूल नियंत्रण के उपाय लागू करने और खराब सड़कों की समस्या दूर करने की जरूरत है। साथ ही, खदानों को दिए गए एक्सटेंशन और नई खदानों की मंजूरी की स्थिति भी पारदर्शी तरीके से सामने आनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रेत खदानों को तीन साल का एक्सटेंशन मिल गया है, तो उनके आसपास रहने वाले ग्रामीणों को धूल और बदहाल सड़कों से राहत कब मिलेगी? खनन शुरू होने के साथ विभागीय निगरानी और जमीनी स्तर पर कार्रवाई कितनी प्रभावी रहती है, इस पर लोगों की नजर रहेगी।

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Shruti Jangde

With over 6 years of experience in the media industry, I specialize in news anchoring, copywriting, and digital journalism. I cover a wide range of news, delivering accurate, unbiased, and fact-based reporting. Passionate about bringing the truth to the public, I am committed to ethical journalism and credible storytelling. My goal is to inform, inspire, and make a meaningful impact through responsible reporting.

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