बेमेतरा की बेटी का कमाल, 10 हजार में बनाया ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में मददगार उपकरण

बेमेतरा-छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की 11वीं कक्षा की छात्रा कोमिका यादव ने अपने वैज्ञानिक नवाचार से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। परिवार में स्तन कैंसर के कारण हुई असमय मौतों से आहत कोमिका ने इस बीमारी के संभावित शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद करने वाला एक उपकरण तैयार करने का प्रयास किया है। उन्होंने महज 10 हजार रुपये की लागत से ‘वियरेबल कैंसर डिटेक्टर ब्रा’ का प्रोटोटाइप बनाया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय इंस्पायर अवॉर्ड मानक प्रतियोगिता में उनके नवाचार को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें सम्मानित किया।
बेमेतरा की छात्रा कोमिका यादव ने बनाया अनोखा प्रोटोटाइप
बेमेतरा जिले के बेरला विकासखंड के ग्राम कंडरका की रहने वाली कोमिका यादव कक्षा 11वीं की छात्रा हैं। कम उम्र में ही उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में कुछ नया करने का सपना देखा और उसे साकार करने की दिशा में काम शुरू किया। उनके इस प्रयास के पीछे कोई व्यावसायिक उद्देश्य नहीं, बल्कि परिवार में स्तन कैंसर के कारण हुई असमय मौतों का दर्द है।
कोमिका ने अपने परिवार में इस बीमारी के कारण अपनों को खोया है। इस अनुभव ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके मन में सवाल उठा कि क्या ऐसा कोई उपकरण बनाया जा सकता है, जो स्तन कैंसर के संभावित शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद कर सके और लोगों को समय रहते चिकित्सकीय जांच कराने के लिए जागरूक करे।
इसी सोच के साथ उन्होंने अपने नवाचार पर काम शुरू किया। जीव विज्ञान की व्याख्याता पुष्पा नायक के मार्गदर्शन में कोमिका ने ‘वियरेबल कैंसर डिटेक्टर ब्रा’ का प्रोटोटाइप तैयार किया। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 10 हजार रुपये बताई गई है।
ESP-32 माइक्रोकंट्रोलर की मदद से तैयार किया प्रोटोटाइप
कोमिका ने अपने उपकरण को तैयार करने के लिए ESP-32 माइक्रोकंट्रोलर और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया। इस नवाचार का उद्देश्य स्तन कैंसर से जुड़े संभावित शुरुआती संकेतों की पहचान में सहायता करना है।
इस तरह का पहनने योग्य उपकरण विकसित करने के पीछे विचार यह है कि तकनीक की मदद से स्वास्थ्य संबंधी संभावित बदलावों पर नजर रखने के नए विकल्प तलाशे जा सकें। हालांकि, किसी उपकरण का प्रोटोटाइप तैयार होना और उसका चिकित्सकीय रूप से प्रभावी साबित होना अलग-अलग बातें हैं।
कोमिका के बनाए प्रोटोटाइप की सटीकता, विश्वसनीयता और चिकित्सकीय उपयोगिता की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञों का मूल्यांकन जरूरी होगा। फिलहाल इसे स्तन कैंसर की पुष्टि करने वाला प्रमाणित मेडिकल उपकरण नहीं माना जाना चाहिए। स्तन में किसी तरह का असामान्य बदलाव महसूस होने पर डॉक्टर से जांच कराना ही उचित कदम है।
790 प्रतिभागियों के बीच दिखाई प्रतिभा
कोमिका यादव के नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय इंस्पायर अवॉर्ड मानक प्रतियोगिता में देशभर से 790 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस मंच पर कोमिका ने अपने प्रोटोटाइप के जरिए अपनी वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता का परिचय दिया।
समारोह में केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कोमिका को सम्मानित किया। इस उपलब्धि ने उनके प्रयासों को पहचान दिलाई और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की उनकी आकांक्षा को नई दिशा दी। उन्हें जापान जाने का अवसर मिलने की जानकारी भी सामने आई है।
ग्रामीण परिवेश से आने वाली कोमिका के लिए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनकी कहानी यह दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर भी विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं को समझकर नए समाधान तलाशने की कोशिश कर सकते हैं।
पिता राजमिस्त्री, मां गृहिणी; सीमित संसाधनों में किया नवाचार
कोमिका यादव एक सामान्य परिवार से आती हैं। उनके पिता राजमिस्त्री हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक परिस्थितियां सीमित होने के बावजूद कोमिका ने विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
किसी भी वैज्ञानिक परियोजना को तैयार करने के लिए विचार के साथ-साथ तकनीकी जानकारी, संसाधन और सही मार्गदर्शन की जरूरत होती है। कोमिका को अपनी शिक्षिका पुष्पा नायक से मार्गदर्शन मिला, जिसकी मदद से उन्होंने अपने विचार को प्रोटोटाइप के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया।
उनकी यह उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने वैज्ञानिक विचारों को आगे बढ़ाने में संकोच करते हैं। कोमिका की कहानी में परिवार के अनुभव, सीखने की जिज्ञासा और किसी समस्या का समाधान खोजने की इच्छा का महत्वपूर्ण योगदान दिखाई देता है।
स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?
स्तन कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में शामिल है। बीमारी की समय पर पहचान होने से इलाज के विकल्पों और परिणामों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है। यही वजह है कि इसके प्रति जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय जांच को महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्तन में गांठ, आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा में असामान्य परिवर्तन, निप्पल में बदलाव या असामान्य स्राव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने का अर्थ हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन उनकी जांच डॉक्टर से कराना जरूरी है। नियमित स्वास्थ्य परामर्श और उम्र व व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार उचित जांच भी महत्वपूर्ण हैं।
कोमिका यादव का नवाचार इसी दिशा में संभावनाओं की तलाश का एक प्रयास है। यदि भविष्य में वैज्ञानिक परीक्षणों के जरिए इसकी उपयोगिता और सटीकता साबित होती है, तो यह आगे के शोध के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, अभी इसके आधार पर किसी बीमारी का निदान करना या चिकित्सकीय जांच की जगह इसका इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा।
बेमेतरा की बेटी की उपलब्धि बनी प्रेरणा
कोमिका यादव ने अपने निजी अनुभव को वैज्ञानिक नवाचार की प्रेरणा में बदलने का प्रयास किया है। करीब 10 हजार रुपये की लागत से तैयार प्रोटोटाइप और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मिली पहचान उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि विज्ञान केवल बड़ी प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। जिज्ञासा, मेहनत और सही मार्गदर्शन से विद्यार्थी अपने आसपास की समस्याओं पर विचार कर सकते हैं और नए समाधान विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। अब उनके प्रोटोटाइप की चिकित्सकीय उपयोगिता की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे। बेमेतरा की इस छात्रा का प्रयास विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।



