कैंसर की 137 दवाओं के दाम घटाने की तैयारी, 9 नवंबर से लागू होगी ट्रेड मार्जिन पर नई सीमा

कैंसर के इलाज का खर्च कम करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30 प्रतिशत तक तय कर दी है। यह व्यवस्था 9 नवंबर से लागू होगी। इससे निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर बिक रही दवाओं के दाम कम हो सकते हैं और मरीजों को इलाज में राहत मिलने की उम्मीद है।
किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?
नई व्यवस्था में एटेजोलिजुमैब, बेवासिजुमैब, डाराटुमुमैब, एन्जालुटामाइड, एर्लोटिनिब, इपिलिमुमैब और लैपाटेनिब जैसी कैंसर रोधी दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का इस्तेमाल कैंसर के अलग-अलग प्रकारों के इलाज में किया जाता है। हालांकि, इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
ट्रेड मार्जिन की गणना जीएसटी को छोड़कर अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर की जाएगी। यह सीमा दवा की खुराक, स्वरूप या इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर नहीं करेगी। इंजेक्शन और टैबलेट सहित सूची में शामिल दवाओं पर यह नियम लागू होगा। अन्य दवाओं के साथ मिलाकर तैयार किए गए फॉर्मूलेशन भी इसके दायरे में आ सकते हैं।
कंपनियों को तय सीमा के अनुसार घटाने होंगे दाम
नई व्यवस्था के तहत दवाओं की संशोधित एमआरपी तय करने के लिए मार्च 2026 में स्टॉकिस्ट या वितरक को दी गई कीमत को आधार बनाया जाएगा। यदि उस महीने किसी दवा की बिक्री नहीं हुई थी, तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक के बिक्री आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस गणना में सरकारी बिक्री को शामिल नहीं किया जाएगा।
जिन दवाओं की मौजूदा कीमत निर्धारित सीमा से अधिक है, उनके निर्माताओं को एमआरपी कम करनी होगी। वहीं, जिन दवाओं की कीमत पहले से ही कम है, उनकी कीमत बढ़ाने की अनुमति नहीं होगी। निर्माता निर्धारित नियमों का पालन करते हुए औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO) के तहत सालाना मूल्य वृद्धि का लाभ ले सकेंगे।
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखना भी जरूरी
प्राधिकरण ने दवा कंपनियों को कैंसर की दवाओं का मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरीजों को इलाज के दौरान दवाओं की कमी का सामना न करना पड़े। यदि कोई कंपनी औसत मासिक उत्पादन कम करना चाहती है, तो उसे पहले अनुमति लेनी होगी। वहीं, उत्पादन या आयात बंद करने की स्थिति में कम से कम छह महीने पहले निर्धारित जानकारी देनी होगी।
यह नियम 31 मार्च 2026 के बाद बाजार में उतारे गए उन फॉर्मूलेशन पर भी लागू होगा, जिनमें सूचीबद्ध दवाएं शामिल हैं। अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को सीधे दवाएं बेचने वाली कंपनियों के लिए भी निर्धारित मूल्य संबंधी प्रावधान लागू होंगे।
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
दवा कंपनियों को संशोधित एमआरपी की जानकारी राजपत्र में आदेश प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर NPPA और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रक को देनी होगी। कीमतों में बदलाव नहीं होने की स्थिति में भी निर्धारित जानकारी देना जरूरी होगा।
अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को दवाओं की कीमतों पर नजर रखने तथा नियमों के उल्लंघन की जानकारी प्राधिकरण को देने के लिए कहा गया है। राज्य औषधि नियंत्रक भी नियमों के पालन की निगरानी करेंगे। निर्धारित जानकारी नहीं देने या अधिक कीमत वसूलने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कैंसर की जरूरी दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण रखना, मरीजों पर इलाज का आर्थिक बोझ कम करना और बाजार में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। हालांकि, प्रत्येक दवा की वास्तविक कीमत में कितनी कमी आएगी, यह संबंधित दवा की मौजूदा एमआरपी और नई निर्धारित कीमत पर निर्भर करेगा।



