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BJP को दूसरी बार हराया, कांग्रेस के अभिजीत वंजारी फिर जीते; MLC चुनाव में 3,271 वोटों से जीत

नागपुर। महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने BJP के उम्मीदवार सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। वंजारी को 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले को 63,960 वोट हासिल हुए। नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में इस सीट पर कांग्रेस की जीत को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

लल्लूराम की रिपोर्ट के मुताबिक, चार राज्यों—महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक—की 28 विधान परिषद सीटों पर हुए चुनावों के बीच नागपुर सीट पर कांग्रेस ने जीत के साथ अपना खाता खोला। महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी की जीत को लेकर भी कांग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।

40 घंटे से ज्यादा चली मतगणना, दूसरे पसंद के वोटों से पलटा मुकाबला

नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला आखिरी चरण तक दिलचस्प बना रहा। मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई और गुरुवार तड़के परिणाम घोषित हुआ। वोटों की गिनती 40 घंटे से ज्यादा समय तक चली। शुरुआती दौर में BJP उम्मीदवार सुधाकर कोहले आगे थे, लेकिन दूसरी पसंद के वोटों की गिनती के बाद कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत हासिल कर ली।

 

पहली पसंद के वोटों की गिनती के दूसरे चरण के बाद कोहले को 60,924 वोट मिले थे, जबकि वंजारी को 56,630 वोट हासिल हुए थे। इस तरह भाजपा उम्मीदवार 4,294 वोटों से आगे थे। निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को भी 24,249 पहली पसंद के वोट मिले। किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा नहीं मिलने के कारण मतगणना अगले चरण में पहुंची।

 

विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में वरीयता आधारित मतदान व्यवस्था के तहत मतदाताओं को उम्मीदवारों के लिए पहली और दूसरी पसंद दर्ज करने का विकल्प मिलता है। जब कोई उम्मीदवार निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो नियमों के अनुसार आगे की वरीयताओं की गिनती की जाती है। नागपुर में इसी प्रक्रिया के दौरान वंजारी ने बढ़त बनाई और अंततः 3,271 वोटों से जीत दर्ज की।

 

फडणवीस और गडकरी के गृह क्षेत्र में भाजपा को झटका

नागपुर महाराष्ट्र की राजनीति में BJP के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भी यह गृह क्षेत्र है। दोनों नेताओं ने भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की जीत ने इस सीट पर भाजपा की चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

 

नागपुर स्नातक सीट पर गडकरी कई कार्यकाल तक विधान परिषद के सदस्य रहे थे। उन्होंने जुलाई 1990 से मई 2014 तक इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। ऐसे में यहां कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत को भाजपा के पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्र में महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

 

अभिजीत वंजारी ने पिछले चुनाव में भी भाजपा उम्मीदवार संदीप जोशी को हराया था। इस बार भाजपा ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को मैदान में उतारा था। लंबे समय तक चली मतगणना और शुरुआती बढ़त के बदलने के बाद वंजारी ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व पर साधा निशाना

 

नतीजे के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोदी और फडणवीस का भ्रम का गुब्बारा फूट गया है। कांग्रेस नेताओं ने नागपुर में जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। वंजारी ने भी कहा कि भाजपा के कई नेता 5 अक्टूबर से नागपुर में मौजूद थे, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस का समर्थन किया।

 

महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी को तीन सीटें

महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में विपक्षी महाविकास आघाड़ी ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटें मिलीं। नागपुर में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने जीत हासिल की। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक सीटों पर शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। वहीं, पुणे शिक्षक सीट भाजपा और अमरावती शिक्षक सीट शिवसेना के खाते में गई।

 इस चुनाव में महायुति के घटक दलों के बीच सीटों को लेकर मतभेद भी चर्चा में रहे। पांच सीटों के नतीजों ने दिखाया कि विधान परिषद के चुनाव में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की पकड़ और वरीयता वाले मतों की भूमिका अहम हो सकती है। हालांकि, इन नतीजों के आधार पर पूरे महाराष्ट्र में किसी एक दल के जनसमर्थन के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

 

 

चार राज्यों की 28 सीटों पर हुए चुनाव

महाराष्ट्र के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक में भी विधान परिषद की सीटों के लिए चुनाव हुए। चारों राज्यों में कुल 28 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया के तहत मतदान और मतगणना कराई गई। महाराष्ट्र की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई। वरीयता आधारित मतगणना के कारण कई सीटों पर परिणाम आने में समय लगा।

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