रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर से बदलेगी छत्तीसगढ़ की तस्वीर, जशपुर से राजधानी का सफर 5-6 घंटे में

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। करीब 707 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन कॉरिडोर का 104 किलोमीटर हिस्सा जशपुर जिले से होकर गुजरेगा। जशपुर में लगभग 3,147 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रही इस परियोजना के पूरा होने पर राजधानी रायपुर तक पहुंचना आसान होने की उम्मीद है। दावा है कि इसके बाद जशपुर से रायपुर का सफर करीब 5 से 6 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इस कॉरिडोर का फायदा केवल जशपुर तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और जशपुर के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा। साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है। बेहतर सड़क नेटवर्क से उद्योग, कृषि, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं।
707 किलोमीटर लंबा होगा इकोनॉमिक कॉरिडोर
केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर करीब 707 किलोमीटर लंबा होगा। इसका लगभग 104 किलोमीटर हिस्सा जशपुर जिले से होकर गुजरेगा। करीब 3,147 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह मार्ग जशपुर, पत्थलगांव और आसपास के क्षेत्रों को बड़े सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा।
फोरलेन सड़क बनने से रायपुर और धनबाद के बीच आवागमन अधिक सुविधाजनक होगा। इसके अलावा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, न्यायधानी बिलासपुर और औद्योगिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण कोरबा तक पहुंच भी आसान हो सकेगी। झारखंड के साथ बेहतर सड़क संपर्क से दोनों राज्यों के बीच व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जशपुर से रायपुर पहुंचने में बचेगा समय
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा जशपुर के लोगों को यात्रा के समय में कमी के रूप में मिल सकता है। फिलहाल जशपुर से रायपुर पहुंचने में काफी समय लगता है। कॉरिडोर तैयार होने के बाद यह सफर करीब 5 से 6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इससे लोगों को राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च शिक्षा, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आने-जाने में सुविधा मिलेगी। व्यापारियों को सामान लाने और स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी कम समय लगेगा।
किसानों और कारोबारियों को मिलेगा फायदा
बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का असर जशपुर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। जिला कृषि, उद्यानिकी, वनोपज और हस्तशिल्प के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यहां उत्पादित फल, सब्जियों और अन्य कृषि उपज को रायपुर सहित बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
फोरलेन सड़क बनने से मालवाहक वाहनों की आवाजाही सुगम होगी। इससे कृषि उत्पादों के परिवहन में लगने वाला समय और खर्च कम होने की संभावना है। खासकर जल्दी खराब होने वाली सब्जियों और उद्यानिकी उत्पादों को समय पर बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा वनोपज और स्थानीय हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारियों को भी नए बाजार मिलने की उम्मीद है। सड़क निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। परिवहन, होटल, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
मयाली नेचर कैंप और मधेश्वर पर्वत तक पहुंच होगी आसान
जशपुर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों, जलप्रपातों और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिलने से जिले के पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
कॉरिडोर बनने के बाद मयाली नेचर कैंप, मधेश्वर पर्वत, रानीदाह जलप्रपात और कैलाश गुफा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान होने की उम्मीद है। इससे प्रदेश के अन्य जिलों के साथ पड़ोसी राज्यों से भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है।
पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों को होटल, होमस्टे, खानपान, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन आधारित छोटे कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अंडरपास और वन्यजीवों की आवाजाही के लिए भी व्यवस्था
इकोनॉमिक कॉरिडोर को आधुनिक सड़क सुविधाओं के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परियोजना में अलग-अलग स्थानों पर अंडरपास, वाहन अंडरपास और अंडरब्रिज बनाने का प्रावधान है। वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए भी आवश्यक संरचनाएं विकसित की जाएंगी।
जशपुर का बड़ा हिस्सा वन और प्राकृतिक संपदा से जुड़ा है। ऐसे में सड़क निर्माण के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके आवागमन को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा। प्रस्तावित व्यवस्थाएं सड़क और वन क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय बनाने में मदद कर सकती हैं।
कनेक्टिविटी के साथ विकास को मिलेगी रफ्तार
रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर जशपुर के लिए महत्वपूर्ण सड़क परियोजना साबित हो सकता है। इससे राजधानी तक पहुंच आसान होने के साथ किसानों और कारोबारियों को बड़े बाजारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने से स्थानीय रोजगार और कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बेहतर सड़क संपर्क से दोनों राज्यों की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सकती है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ सड़क निर्माण पूरा होने और कॉरिडोर के शुरू होने के बाद ही सामने आएगा।



