अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप को बड़ा झटका, प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स ने हासिल किया बहुमत

अमेरिका में हुए मिडटर्म चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही रिपब्लिकन पार्टी के हाथ से सदन का नियंत्रण निकल गया है। चुनाव में हार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी नतीजों को स्वीकार कर लिया है और विपक्षी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
ट्रंप बोले- डेमोक्रेट्स के साथ काम करने को तैयार
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह नतीजों को स्वीकार करते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अमेरिकी मतदाताओं का धन्यवाद भी किया। ट्रंप ने दावा किया कि वह खुद चुनाव मैदान में नहीं थे, अगर ऐसा होता तो उनकी पार्टी भारी बहुमत से जीत हासिल करती। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चुनाव परिणामों को लेकर कोई पछतावा नहीं है।
महंगाई और ईरान युद्ध बना चुनाव का बड़ा मुद्दा
साल 2023 से प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण रखने वाली रिपब्लिकन पार्टी इस बार अपनी मामूली बढ़त भी बरकरार नहीं रख सकी। चुनाव में महंगाई मतदाताओं की सबसे बड़ी चिंता रही। ईरान युद्ध और ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए टैरिफ के कारण अमेरिकी नागरिकों के रोजमर्रा के खर्च बढ़े हैं। इसका असर चुनावी नतीजों में भी देखने को मिला।
प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाली कई सीटों पर जीत दर्ज की। नॉर्थ कैरोलिना के एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने जीत हासिल की, जहां 15 साल से अधिक समय से रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा था। इसके अलावा पेंसिल्वेनिया, केंटकी और कोलोराडो जैसे राज्यों में भी डेमोक्रेट्स ने अपनी स्थिति मजबूत की।
सीनेट में भी डेमोक्रेट्स को बढ़त
सीनेट के चुनाव परिणामों में भी डेमोक्रेटिक पार्टी ने बढ़त बनाई है। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे तक डेमोक्रेट्स 50 सीटें जीत चुके थे, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 39 सीटों पर सफलता मिली थी। डेमोक्रेट्स पांच अन्य सीटों पर भी आगे चल रहे थे।
अमेरिकी सीनेट में कुल 100 सीटें होती हैं और प्रत्येक राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। सीनेटरों का कार्यकाल छह साल का होता है। ऐसे में इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति ट्रंप के आगामी राजनीतिक फैसलों और सरकार के कामकाज पर असर डाल सकते हैं।



