पंजाब में पराली जलाने पर सख्ती, 423 से ज्यादा FIR दर्ज; किसानों पर 29 लाख रुपये का जुर्माना

पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खेतों में फसल अवशेष जलाए जाने के कारण राज्य के कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। पिछले चार दिनों में पराली जलाने के करीब 1,000 मामले सामने आए हैं। प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर को राज्य में पराली जलाने के 584 नए मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही 15 सितंबर से अब तक ऐसे मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,196 हो गई है। धान की कटाई के बाद किसान अगली फसल की बुआई के लिए खेतों को जल्दी तैयार करना चाहते हैं। इसी वजह से कई जगहों पर फसल अवशेषों को आग लगाई जा रही है।
कई शहरों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक
पराली जलाने से उठने वाला धुआं पंजाब के कई शहरों की हवा को प्रदूषित कर रहा है। संगरूर में सुबह के समय घना स्मॉग छाया हुआ दिखाई दिया। कई जगहों पर दृश्यता इतनी कम रही कि नेशनल हाईवे पर भी दूर तक देखना मुश्किल हो गया।
औद्योगिक शहर खन्ना में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 293 तक पहुंच गया है। वहीं, लुधियाना और अमृतसर में भी AQI 200 से 250 के पार दर्ज किया गया है। ये स्तर खराब से बेहद चिंताजनक श्रेणी में आते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी हवाओं की रफ्तार धीमी होने के कारण धुआं और स्मॉग वातावरण में जमा हो रहा है।
423 से ज्यादा FIR, 29 लाख रुपये का जुर्माना
पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। अब तक 573 से अधिक मामलों में 29 लाख रुपये से ज्यादा का पर्यावरण मुआवजा लगाया जा चुका है। इसके अलावा 423 से अधिक आधिकारिक FIR भी दर्ज की गई हैं।
खेतों में सबूत मिटाने की भी कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ किसान पराली जलाने के बाद खेतों में ट्रैक्टर चलाकर जमीन की जुताई कर देते हैं, ताकि आग लगाने के सबूत मिटाए जा सकें। इससे प्रशासन के लिए ऐसे मामलों की पहचान और कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। धान कटाई का सीजन जारी रहने के कारण आने वाले दिनों में पराली जलाने और प्रदूषण की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।



