अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: चीनी कंपनियों के मुनाफे का हिस्सा सेना तक पहुंचता है, बढ़ सकती हैं वैश्विक चिंताएं

एजेंसी। अमेरिका की खुफिया और सरकारी एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने चीन की कुछ बड़ी कंपनियों को लेकर गंभीर दावे किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा, इंटरनेट सर्च कंपनी बाइडू और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता बीवाईडी तथा निओ जैसी कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से चीन की सेना, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA), को उपलब्ध कराती हैं।
इस खुलासे के बाद अमेरिका और चीन के बीच पहले से मौजूद रणनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा में नया तनाव पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने की बात कही थी। हालांकि अमेरिकी एजेंसियों की इस रिपोर्ट ने दोनों देशों के बीच अविश्वास को फिर से चर्चा में ला दिया है।
विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट को भेदभावपूर्ण और निराधार बताया
चीन के विदेश मंत्रालय ने रिपोर्ट को भेदभावपूर्ण और निराधार बताया है। वहीं संबंधित चीनी कंपनियों ने भी अमेरिका से रिपोर्ट की समीक्षा करने और कथित गलत आरोपों को वापस लेने की मांग की है।
उनका कहना है कि वे व्यावसायिक नियमों के तहत काम करती हैं और किसी भी तरह के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, रक्षा और वैश्विक प्रभाव की लड़ाई से भी जुड़ा हुआ है। अमेरिका पहले भी चीन की कई तकनीकी और सेमीकंडक्टर कंपनियों को सेना से जुड़े संस्थानों की सूची में शामिल कर चुका है।
भारत समेत दुनिया के कई देशों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करती
गौरतलब है कि इनमें से कई चीनी कंपनियां भारत समेत दुनिया के कई देशों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करती हैं। ऐसे में अमेरिकी रिपोर्ट के दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है, इसलिए मामले पर अंतिम निष्कर्ष निकलने से पहले आधिकारिक जांच और तथ्यों का इंतजार किया जा रहा है।

