फायर सेफ्टी व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त
मॉल, होटल, कोचिंग सेंटर और बहुमंजिला इमारतों की होगी जांच

बिलासपुर। लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ में फायर(fire) सेफ्टी व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य में फायर सुरक्षा व्यवस्था की लचर स्थिति पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा है कि केवल टेंडर जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभाव जमीन पर दिखाई देना चाहिए। कोर्ट ने फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट राज्य शासन से तलब की है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से पूछा कि फायर(fire) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए जा रहे कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है। कोर्ट के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की जांच के लिए विशेष समितियों का गठन किया है। शहर स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समितियां बनाई गई हैं, जबकि प्रत्येक अनुविभाग में अलग-अलग जांच दल गठित किए गए हैं। इन समितियों को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
दरअसल, वर्ष 2020 में राज्य के विभिन्न जिलों में नए फायर स्टेशन स्थापित करने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन कई जिलों में अब तक उपयुक्त जमीन का चयन नहीं हो पाया है। हाल ही में बिलासपुर के मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए स्वीकार किया है।
राज्य शासन ने अदालत को बताया है कि प्रदेश में लगभग 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर(fire) उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि, मुंगेली, जीपीएम, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा, नारायणपुर सहित 11 जिलों में अब तक जमीन का आवंटन नहीं हो सका है। वहीं गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन उपलब्ध होने के बाद निर्माण कार्य के लिए राशि भी जारी कर दी गई है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीदी से संबंधित अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

