मनरेगा में राज्यांश बढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस का हमला
दीपक बैज का आरोप, केंद्र के दबाव में राज्य सरकार ने जनता पर डाला आर्थिक बोझ

रायपुर | प्रदेश कांग्रेस(Congress) कमेटी ने राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मनरेगा में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के वित्तीय हिस्सेदारी के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने पर राज्य सरकार की आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि यह निर्णय राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है और इससे अन्य विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
दीपक बैज ने जारी बयान में कहा कि मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे भाजपा शासित राज्यों ने भी मनरेगा में राज्यों पर बढ़ने वाले वित्तीय भार को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार को भी राज्य के हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था का विरोध करना चाहिए था।
प्रदेश कांग्रेस(Congress) अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों और जीएसटी व्यवस्था के कारण पहले से ही आर्थिक दबाव मौजूद है। ऐसे में मनरेगा के खर्च में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ने से अन्य योजनाओं और विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस व्यवस्था के लिए लगभग 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया है, जबकि पूर्व में मनरेगा पर लगभग 6,200 करोड़ रुपये खर्च किए जाते रहे हैं।
कांग्रेस(Congress) ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा के कार्य दिवस बढ़ाने की घोषणा के बावजूद बजटीय प्रावधान में कमी से रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने राज्य सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार करने और केंद्र सरकार के समक्ष राज्य के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।

