मंत्रोच्चार पर दायर याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
सबूत मिलने पर दोबारा याचिका दायर करने की दी गई छूट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार और प्रार्थना के अनिवार्य पाठ को चुनौती देने वाली याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट(High Court) ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में सरकारी स्कूलों में संबंधित सर्कुलर के पालन के ठोस साक्ष्य सामने आते हैं, तो इस मामले में नई याचिका दायर की जा सकती है।
सर्कुलर के क्रियान्वयन के सबूत न होने पर हाईकोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट(High Court) को बताया गया कि 12 जून को जारी सर्कुलर के बावजूद प्रदेश के किसी भी सरकारी स्कूल में अब तक मंत्रोच्चार या प्रार्थना का अनिवार्य क्रियान्वयन शुरू नहीं हुआ है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से भी सर्कुलर के पालन का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिज़वी ने याचिका दायर कर राज्य सरकार के सर्कुलर को संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 और 28 का उल्लंघन बताते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने तर्क दिया कि सरकारी स्कूलों में किसी भी धार्मिक गतिविधि को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने कहा- ठोस प्रमाण के साथ फिर आ सकते हैं याचिकाकर्ता
हालांकि, हाईकोर्ट(High Court) ने अपने आदेश में कहा कि यदि भविष्य में किसी सरकारी स्कूल में सर्कुलर के पालन से संबंधित वीडियो, दस्तावेज या अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध होते हैं, तो उन्हें रिकॉर्ड पर प्रस्तुत कर नई याचिका दायर की जा सकती है। फिलहाल राज्य सरकार के सर्कुलर पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगाई गई है।

