40-50 साल से रह रहे परिवारों को अतिक्रमण नोटिस
अतिक्रमण नोटिस पर ग्रामीणों का विरोध

बिलासपुर। बिलासपुर जिले के कोटा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनपुरी के आश्रित ग्राम डोलमोहा में अतिक्रमण(Encroachment) नोटिस को लेकर ग्रामीणों और पंचायत के बीच विवाद गहरा गया है। वर्षों से एक ही जगह पर रह रहे परिवारों ने पंचायत द्वारा जारी नोटिस का विरोध करते हुए मंगलवार को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से इस जमीन पर निवास कर रहे हैं। कई परिवारों ने शासन की विभिन्न आवास योजनाओं का लाभ लेकर पक्के मकान भी बना लिए हैं। इसके बावजूद उन्हें बेजा कब्जाधारी बताते हुए तीन दिन के भीतर मकान हटाने का नोटिस दिया गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और फिलहाल नोटिस पर रोक लगाने की मांग की है।
ग्रामीण बोले- वर्षों से रह रहे हैं, अब बेदखली का डर
जनदर्शन पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस भूमि पर उनका निवास है और गांव में उनका जीवन-यापन पूरी तरह इसी स्थान से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा लगातार उन पर मकान अतिक्रमण(Encroachment) करने का दबाव बनाया जा रहा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि महिलाओं को भी मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे परिवारों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें यहां से हटाया जाता है तो उनके सामने रहने का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मामले की वस्तुस्थिति की जांच कराई जाए और वर्षों से रह रहे परिवारों को उसी भूमि का वैध पट्टा प्रदान किया जाए। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली उचित नहीं होगी।
पंचायत ने श्मशान भूमि से अतिक्रमण हटाने की बात कही, प्रशासनिक जांच का इंतजार
दूसरी ओर पंचायत की ओर से जारी नोटिस में संबंधित भूमि को सार्वजनिक श्मशान घाट की जमीन बताया गया है और वहां से अतिक्रमण(Encroachment) हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसी नोटिस के बाद विवाद बढ़ गया और ग्रामीण अपनी मांग लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। फिलहाल मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन के फैसले पर टिकी है कि वर्षों से रह रहे परिवारों को राहत मिलती है या पंचायत के नोटिस के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।

