जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में ब्रांड्स की दिलचस्पी घटी, विज्ञापन बाजार 200 करोड़ के अनुमान से सिमटकर 20 करोड़ तक पहुंचा

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 के दौरान इस बार विज्ञापन और ब्रांड एक्टिवेशन में पिछले वर्ष की तुलना में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। जहां वर्ष 2025 में इस आयोजन को लगभग 200 करोड़ रुपये के विज्ञापन अवसर के रूप में देखा जा रहा था, वहीं इस बार अनुमानित विज्ञापन कारोबार घटकर 15 से 20 करोड़ रुपये तक सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष रथ यात्रा से करीब 50 से 52 ब्रांड जुड़े थे, जबकि इस बार केवल 20 से 25 ब्रांडों ने ही भागीदारी की है। अधिकांश कंपनियों ने बड़े ब्रांड एक्टिवेशन की बजाय छोटे स्टॉल और कियोस्क लगाने को प्राथमिकता दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केटिंग बजट में कटौती, विज्ञापन स्थानों की बढ़ती कीमतें, खराब मौसम और विज्ञापन व्यवस्था में बढ़ते मध्यस्थों की भूमिका इस गिरावट के प्रमुख कारण रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में समुद्र तट और अन्य प्रमुख स्थानों पर विज्ञापन लगाने की लागत में काफी वृद्धि हुई, जिससे कई कंपनियों ने निवेश से दूरी बना ली।
भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका ने भी कंपनियों की चिंता बढ़ाई। कई ब्रांडों ने महंगे आउटडोर इंस्टॉलेशन लगाने से परहेज किया, जबकि कुछ स्थानों पर तैयार की गई सार्वजनिक सुविधाओं को खराब मौसम के कारण दोबारा तैयार करना पड़ा।
इस वर्ष कंपनियों ने केवल ब्रांडिंग की बजाय प्रत्यक्ष बिक्री वाले माध्यमों को अधिक महत्व दिया। स्टॉल सबसे अधिक पसंद किए गए क्योंकि इनके जरिए उत्पादों की सीधी बिक्री संभव हो सकी। केवल दृश्यता के लिए बड़े विज्ञापन अभियान चलाने में कंपनियों की रुचि कम रही।
रथ यात्रा में इस बार अल्ट्राटेक, पॉलीकैब, फॉर्च्यून, कोका-कोला, कैंपा और रिलायंस फाउंडेशन जैसे ब्रांड शामिल हुए। इनकी मौजूदगी मुख्य रूप से पेयजल केंद्र, विश्राम स्थल, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन और पुलिस सहायता केंद्र जैसी जनसुविधाओं के माध्यम से रही।
हालांकि, पारले ने इस वर्ष रथ यात्रा में अपने निवेश को बढ़ाते हुए ओडिया भाषा में विशेष प्रचार अभियान, ब्रांडिंग, प्रोडक्ट सैंपलिंग और डिजिटल गतिविधियों के जरिए उपस्थिति दर्ज कराई। कंपनी का मानना है कि जगन्नाथ रथ यात्रा, छठ और बिहू जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में उपभोक्ताओं से जुड़ने की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में आज भी लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और ये ब्रांडों के लिए भरोसा कायम करने का बड़ा मंच हैं। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कंपनियां अब केवल उन्हीं आयोजनों में निवेश कर रही हैं, जहां उन्हें खर्च के अनुपात में बेहतर व्यावसायिक लाभ मिलने की उम्मीद हो।

