सरकार का स्पष्ट जवाब: पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल मिश्रण पर फिलहाल कोई फैसला नहीं

पेट्रोल में 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल मिश्रण को लेकर उठ रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। राज्यसभा में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि भविष्य में यदि एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने पर विचार किया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और ऑटोमोबाइल कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों तथा संबंधित विशेषज्ञ संस्थानों से व्यापक चर्चा की जाएगी।
सरकार ने बताया कि भारत ने निर्धारित समय से पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। वर्ष 2013-14 में औसत एथेनॉल मिश्रण 1.53 प्रतिशत था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया है।
सरकार के अनुसार वर्ष 2014-15 से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.97 ट्रिलियन रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके साथ ही करीब 316 लाख टन कच्चे तेल की खपत कम हुई, लगभग 952 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई और किसानों की आय में 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
वाहनों के प्रदर्शन को लेकर सरकार ने कहा कि अब तक E20 ईंधन के इस्तेमाल से इंजन खराब होने, फ्यूल सिस्टम में समस्या, जंग लगने या अन्य तकनीकी दिक्कतों की कोई व्यापक अथवा प्रमाणित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सरकार ने बताया कि इस संबंध में प्राप्त चिंताओं का वैज्ञानिक परीक्षण भी कराया गया है।
माइलेज को लेकर सरकार का कहना है कि पुराने वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग से ईंधन दक्षता में सामान्यतः 3 से 5 प्रतिशत तक ही कमी आती है, जबकि उच्च ऑक्टेन और स्वच्छ दहन जैसे लाभ भी मिलते हैं। वाहन निर्माता कंपनियां E20 ईंधन के अनुरूप वाहनों पर वारंटी भी जारी रखे हुए हैं।
खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल अतिरिक्त उपलब्ध अनाज का उपयोग किया जाता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और बफर स्टॉक की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद ही अतिरिक्त अनाज एथेनॉल उत्पादन में लिया जाता है।
जल संरक्षण के संबंध में सरकार ने बताया कि एथेनॉल उत्पादन में मक्का जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक को बढ़ावा दिया गया है। साथ ही सभी डिस्टिलरी इकाइयों के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली अपनाना अनिवार्य किया गया है ताकि जल संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
सरकार ने यह भी बताया कि फिलहाल कम एथेनॉल मिश्रण या बिना एथेनॉल वाले पेट्रोल की अलग आपूर्ति व्यवस्था शुरू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि इससे लागत बढ़ने के साथ पर्यावरण और किसानों को मिलने वाले लाभ भी प्रभावित होंगे।

