पेपर लीक पर चर्चा को तैयार सरकार और विपक्ष, फिर भी तीसरे दिन क्यों नहीं चल सकी संसद?

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन भी पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी। सरकार और विपक्ष दोनों ने कहा कि वे इस विषय पर बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन चर्चा के तरीके और नियमों को लेकर सहमति नहीं बनने से सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों चर्चा चाहते हैं। उन्होंने दोनों पक्षों से आपसी बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की। वहीं राज्यसभा में भी सरकार की ओर से कहा गया कि वह पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पहले दिन से ही इस विषय पर बहस चाहती है। दूसरी ओर, विपक्ष का कहना है कि चर्चा से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। विपक्ष छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक मामले पर जवाब भी मांग रहा है।
राज्यसभा में विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा चाहता है। इस नियम के तहत सदन के अन्य कामकाज रोककर सबसे पहले संबंधित मुद्दे पर चर्चा होती है। वहीं लोकसभा में विपक्ष स्थगन प्रस्ताव के जरिए बहस कराने की मांग कर रहा है। इस प्रक्रिया में भी सदन का सामान्य कामकाज रोक दिया जाता है।
सरकार इन नियमों के तहत चर्चा कराने के पक्ष में नहीं है, जबकि विपक्ष इन्हीं प्रावधानों के तहत बहस कराने पर जोर दे रहा है। इसी मतभेद के कारण तीसरे दिन भी संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
संसद में किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा होने से सरकार और विपक्ष दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। साथ ही बहस का पूरा रिकॉर्ड संसद की कार्यवाही का हिस्सा बनता है, जिससे जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी तय होती है।

