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हूतियों की बढ़ती गतिविधियों से सऊदी अरब चिंतित, चीन ने ईरान से कहा- अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रोकें

नई दिल्ली। यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने इस मामले में चीन से मदद मांगी है। इसके बाद चीन ने ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उन्हें ऐसी गतिविधियों से रोकने की अपील की है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

रॉयटर्स ने तीन ईरानी सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में हूतियों ने यमन के लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास अपनी गतिविधियां तेज की हैं। इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात और समुद्री जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ी है।

सऊदी अरब ने चीन से क्यों मांगी मदद?

यमन के पास स्थित लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। यहां तनाव बढ़ने या जहाजों पर हमले का खतरा पैदा होने से तेल और अन्य सामानों की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इसी वजह से सऊदी अरब ने चीन से मदद मांगी। चीन के ईरान के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं और वह ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। ऐसे में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

चीन ने ईरान से क्या कहा?

चीन सार्वजनिक रूप से क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील करता रहा है। लेकिन रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान से हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने और उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करने को कहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का उद्देश्य यमन और लाल सागर में तनाव को और बढ़ने से रोकना तथा महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चीन ने यह संदेश ईरान तक किस माध्यम से पहुंचाया।

ईरान ने चीन को क्या जवाब दिया?

रॉयटर्स के अनुसार, ईरान ने चीन के संदेश के जवाब में कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है, जब अमेरिका और इजराइल के साथ चल रहा युद्ध समाप्त हो। ईरान ने क्षेत्रीय तनाव को व्यापक मध्य पूर्व संघर्ष से जोड़ते हुए अपनी स्थिति रखी है।

बढ़ सकता है तेल और व्यापार पर असर

मध्य पूर्व में समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार के लिए चुनौती बन सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के साथ लाल सागर और बाब-अल-मंदेब भी तेल और अन्य सामान की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अगर इन रास्तों पर जहाजों के लिए जोखिम बढ़ता है, तो शिपिंग कंपनियों को वैकल्पिक और लंबे मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। इससे परिवहन लागत और डिलीवरी का समय बढ़ सकता है। लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में वैश्विक तेल कीमतों और आपूर्ति पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।

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