हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब ने मांगी मदद, बाब अल-मंडेब स्ट्रेट बंद हुआ तो ग्लोबल ट्रेड पर पड़ेगा बड़ा असर

रियाद। हूतियों के खिलाफ जारी संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने मिडिल ईस्ट के देशों और अप्रत्यक्ष रूप से इजराइल से मदद मांगी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने दूसरे गल्फ देशों और मिस्र से सीधे संपर्क कर सहयोग की अपील की है। वहीं, इजराइल से अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क किया गया और इंटेलिजेंस समेत अन्य सहायता मांगी गई है।
सऊदी अरब की चिंता मुख्य रूप से बाब अल-मंडेब स्ट्रेट को लेकर है। आशंका है कि हूतियों की ओर से इसे ब्लॉक किए जाने पर तेल की सप्लाई और वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्ट्रेट बंद हुआ तो ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
मोहम्मद बिन सलमान ने सहयोगी देशों को बताया है कि बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के बंद होने से पूरे क्षेत्र के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है।
बाब अल-मंडेब समुद्री मार्ग अदन की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है और आगे यह रूट स्वेज नहर तथा भूमध्यसागर की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग से जुड़ता है। इस रास्ते से कार्गो जहाजों के अलावा तेल और LNG टैंकर भी गुजरते हैं।
तेल सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ता
खाड़ी देशों से यूरोप जाने वाले तेल के टैंकरों के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इनमें UAE से तेल लेकर जाने वाले टैंकर शामिल हैं। दूसरी ओर, सऊदी अरब के टैंकर लाल सागर के पोर्ट यानबू से फार ईस्ट की ओर जाते हैं।
सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से के तेल क्षेत्रों और रिफाइनरियों से क्रूड ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए यानबू तक पहुंचता है। बाब अल-मंडेब के रास्ते में बाधा आने पर टैंकरों को लंबा समुद्री रास्ता अपनाना पड़ता है। इसके चलते सऊदी अरब को हाल के हफ्तों में अफ्रीका के चारों ओर से जहाज भेजने पड़े हैं।
मिस्र को भी सता रही चिंता
सऊदी नेतृत्व ने मिस्र को भी संभावित संकट के बारे में चेताया है। बाब अल-मंडेब की नाकेबंदी से स्वेज नहर के जरिए होने वाली शिपिंग प्रभावित हो सकती है, जबकि स्वेज नहर मिस्र की आय के प्रमुख स्रोतों में शामिल है।
गल्फ देशों के राजनयिक अधिकारियों के मुताबिक, मिस्र सऊदी अरब की चिंता से सहमत है। उसने सऊदी अरब की मदद की अपील का समर्थन करते हुए अमेरिकी अधिकारियों से भी संपर्क किया है।
ट्रंप प्रशासन सीधे युद्ध में उतरने से बच रहा
अमेरिका फिलहाल सऊदी अरब को सीधे सैन्य सहायता देने को लेकर सतर्क नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर को सऊदी अरब भेजा गया था, ताकि वे स्थिति का आकलन कर सकें और मौजूदा अमेरिकी मदद को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा कर सकें।
सऊदी अरब में पहले से दर्जनों अमेरिकी सैन्यकर्मी मौजूद हैं, जो इलाके में इंटेलिजेंस और ऑपरेशनल गतिविधियों के समन्वय में मदद कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों और गल्फ देशों के राजनयिकों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल सऊदी अरब को सीधी सैन्य मदद देने को लेकर हिचक रहे हैं।
हूती ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की तैयारी?
वाशिंगटन उन हूती लड़ाकों के खिलाफ एयर स्ट्राइक की संभावना पर भी विचार कर रहा है, जो हाल के दिनों में बाब अल-मंडेब के पास अहम ठिकानों तक पहुंच गए हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, कार्रवाई की स्थिति में इन कब्जाए गए ठिकानों पर रडार और मिसाइल लॉन्चर तैनात किए जाने की आशंका है।
हूतियों ने नवंबर 2023 में बाब अल-मंडेब के आसपास जहाजों पर हमले शुरू किए थे। उनका कहना था कि गाजा में युद्ध के बाद वे फिलिस्तीनियों के समर्थन में यह कार्रवाई कर रहे हैं। इसके बाद अमेरिका, इजराइल और एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ने हूती ठिकानों के खिलाफ लंबे समय तक एयर स्ट्राइक और मिसाइल हमले किए।



