हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य ताकत से लाल सागर में चिंता, मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा जखीरा

यमन के हूती विद्रोही पिछले कुछ वर्षों में अपनी सैन्य क्षमता को काफी मजबूत कर चुके हैं। कभी सीमित क्षेत्र में सक्रिय रहने वाला यह संगठन अब मिसाइल, ड्रोन, रॉकेट और समुद्री हमले में इस्तेमाल होने वाले हथियारों से लैस बताया जाता है। लाल सागर के तट और रणनीतिक बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास उनकी बढ़ती मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हूती लड़ाकों की संख्या में बढ़ोतरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालिया सैन्य अभियानों के दौरान हूती लड़ाकों की संख्या करीब एक लाख तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। उनकी सैन्य क्षमता बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। 2014 में राजधानी सना पर नियंत्रण के बाद उन्हें यमनी सेना के हथियारों के बड़े भंडार तक पहुंच मिली। इनमें पुराने मिसाइल सिस्टम और दूसरे सैन्य उपकरण शामिल थे।
इसके अलावा, ईरान से तकनीकी सहायता और हथियारों से जुड़ी मदद मिलने की बात भी विभिन्न रिपोर्ट्स में कही गई है। युद्ध के दौरान विरोधी पक्ष से कब्जे में लिए गए हथियारों ने भी उनकी सैन्य क्षमता बढ़ाने में भूमिका निभाई।
मिसाइल और ड्रोन बने बड़ी ताकत
हूतियों के पास अलग-अलग प्रकार की बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें होने का अनुमान है। रिपोर्ट्स में करीब 100 से 200 लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का जिक्र किया गया है। इनमें पैलेस्टाइन-2 और हातेम जैसी मिसाइलें शामिल बताई जाती हैं।
ड्रोन के मामले में भी उनकी क्षमता काफी बड़ी बताई गई है। अनुमान के मुताबिक उनके पास एक हजार से कम ड्रोन हो सकते हैं। समद और कासेफ जैसे ड्रोन का इस्तेमाल हमलों में किए जाने की बात कही जाती है। इसके अलावा कुद्स जैसी क्रूज मिसाइलों और विस्फोटक ड्रोन नौकाओं का भी उनके हथियारों में शामिल होना बताया गया है।
लाल सागर और बाब-अल-मंडेब पर बढ़ी चिंता
बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। यमन के लाल सागर तट और पेरिम द्वीप के आसपास हूतियों की मौजूदगी बढ़ने से उनकी समुद्री मार्ग के करीब पहुंच मजबूत हुई है।
हालांकि, उनकी मौजूदगी का यह मतलब नहीं है कि वे तत्काल पूरे समुद्री मार्ग को बंद कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी स्थिति मजबूत करने और लगातार हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने की जरूरत होगी। फिर भी, इस क्षेत्र में उनकी बढ़ती सैन्य गतिविधियों से जहाजों की सुरक्षा और तेल समेत अन्य सामान की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
हथियारों की सप्लाई के कई रास्ते
हूतियों के हथियारों का एक हिस्सा यमन की पुरानी सेना के भंडार से मिलने की बात कही जाती है। इसके अलावा युद्ध के दौरान कब्जे में लिए गए हथियार और ईरान से मिलने वाली तकनीकी सहायता का भी उल्लेख किया जाता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, समय के साथ हथियारों की आपूर्ति के तरीकों में बदलाव हुआ है। तैयार मिसाइल और ड्रोन भेजने के बजाय उनके हिस्सों और तकनीकी उपकरणों को अलग-अलग भेजे जाने की बात सामने आई है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर इन उपकरणों को हथियारों में बदलने की क्षमता विकसित होने का दावा किया गया है।
अमेरिका से बातचीत और समुद्री तनाव
लाल सागर में तनाव कम करने के लिए अमेरिकी अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच ओमान में बातचीत भी हुई है। ओमान ने इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बातचीत में बाब-अल-मंडेब को खुला रखने और समुद्री तनाव कम करने पर चर्चा होने की बात कही गई है।
हूतियों और अमेरिका के बीच मई 2025 में हुए युद्धविराम को जारी रखने को लेकर भी चर्चा हुई। वहीं, क्षेत्र में सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई और हूतियों की गतिविधियों के बीच लाल सागर की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।



