अमेरिका ने पहली बार माना- पृथ्वी की कक्षा में तैनात किए अंतरिक्ष हथियार, रूस-चीन से बढ़ी स्पेस रेस की चिंता

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में बढ़ती सैन्य होड़ के बीच अमेरिका ने बड़ा खुलासा किया है। अमेरिका ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसने पृथ्वी की कक्षा में अंतरिक्ष हथियार तैनात किए हैं। अमेरिकी एयरफोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मैनिक ने कहा कि ये ‘ऑन-ऑर्बिट स्पेस कंट्रोल वेपन्स’ अमेरिकी सेनाओं को दुश्मन के संभावित हमले से बचाने के लिए जरूरी हैं।
हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये हथियार किस तरह काम करते हैं, कितने हथियार तैनात किए गए हैं और इन्हें कब कक्षा में भेजा गया।
रूस और चीन की बढ़ती क्षमताओं के बीच बड़ा ऐलान
ट्रॉय मैनिक का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका लगातार रूस और चीन की बढ़ती अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं को लेकर चिंता जताता रहा है। अमेरिका का दावा है कि दोनों देश तेजी से अपनी अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहे हैं।
अमेरिका के मुताबिक, चीन ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे अंतरिक्ष में मौजूद सिस्टम और दूसरे देशों के सैटेलाइट को प्रभावित किया जा सकता है। वहीं, रूस भी अंतरिक्ष को भविष्य के युद्ध का अहम हिस्सा मानता है।
युद्ध में अंतरिक्ष की बढ़त दे सकती है बड़ा फायदा
अमेरिका का मानना है कि आने वाले समय में अंतरिक्ष में बढ़त किसी भी युद्ध में बड़ा रणनीतिक फायदा दे सकती है। अमेरिका वर्ष 2007 से रूस और चीन के अंतरिक्ष हथियारों के परीक्षण और इस्तेमाल को लेकर चेतावनी देता रहा है।
इन गतिविधियों के चलते अमेरिका का मानना है कि अंतरिक्ष अब युद्ध का एक नया मैदान बन चुका है। यही वजह है कि वह अपनी अंतरिक्ष सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
जरूरत पड़ी तो रक्षात्मक और आक्रामक इस्तेमाल
एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में ट्रॉय मैनिक ने कहा कि अमेरिका बदलते खतरों से निपटने के लिए तैयार है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रवक्ता के मुताबिक, अंतरिक्ष में मौजूद इन क्षमताओं का जरूरत पड़ने पर रक्षात्मक और आक्रामक, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। सैनिकों के GPS, संचार, निगरानी, खुफिया जानकारी और टारगेटिंग जैसी कई जरूरी सेवाएं सैटेलाइट पर निर्भर हैं।
अगर किसी देश के सैटेलाइट को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर केवल सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगा। संचार सेवाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
किस तरह के हथियार तैनात किए गए हैं?
अमेरिका ने अभी यह साफ नहीं किया है कि कक्षा में तैनात किए गए हथियार वास्तव में किस प्रकार के हैं। अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाली सैन्य तकनीक में साइबर सिस्टम, लेजर और ऐसे सैटेलाइट शामिल हो सकते हैं जो दूसरे सैटेलाइट को प्रभावित या नुकसान पहुंचाने में सक्षम हों।
स्पेस कंट्रोल में ऐसे अभियान शामिल होते हैं जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष में चुनौती देने और नियंत्रण बनाए रखने की क्षमता हासिल करना है। इसमें विरोधी की अंतरिक्ष क्षमताओं को प्रभावित, बाधित, कमजोर या जरूरत पड़ने पर नष्ट करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
2019 में बनी थी अमेरिकी स्पेस फोर्स
अमेरिकी स्पेस फोर्स की स्थापना 2019 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद अमेरिकी संपत्तियों की सुरक्षा करना है। इनमें संचार, निगरानी और अन्य सैन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल होने वाले सैकड़ों सैटेलाइट शामिल हैं।
अमेरिका का कहना है कि रूस और चीन की बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए अपनी अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा और जवाबी क्षमता मजबूत करना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत अमेरिका अंतरिक्ष में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।
अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ से बढ़ेगा मलबे का खतरा
अंतरिक्ष में सैन्य गतिविधियां बढ़ने का सबसे बड़ा खतरा स्पेस डेब्रिस यानी अंतरिक्ष मलबे का है। अगर किसी सैटेलाइट को नष्ट किया जाता है, तो उसके टुकड़े तेज रफ्तार से कक्षा में फैल सकते हैं।
इससे दूसरे सैटेलाइटों के टकराने का खतरा बढ़ जाता है और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी गंभीर मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
अमेरिका द्वारा पहली बार अंतरिक्ष में हथियार तैनात करने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार करना इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे अमेरिका, रूस और चीन के बीच चल रही अंतरिक्ष की सैन्य प्रतिस्पर्धा अब पहले से ज्यादा खुलकर सामने आ गई है।



