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Chhattisgarh

रायपुर में नो फ्लैक्स जोन के नियमों की उड़ रही धज्जियां, सड़क किनारे लटकते बैनर बने खतरा

रायपुर। राजधानी रायपुर की सड़कों पर नगर निगम के नियमों की खुलेआम अनदेखी होती नजर आ रही है। शहर में जगह-जगह बिजली के खंभों, बिल्डिंगों और सड़क किनारे रंग-बिरंगे फ्लैक्स-बैनर लटके हुए हैं। इनमें राजनीतिक नेताओं के जन्मदिन और बधाई संदेश से लेकर व्यावसायिक विज्ञापन और सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार तक शामिल हैं।

खास बात यह है कि इनमें से कई पोस्टर-बैनर उन मार्गों पर भी लगे हैं, जिन्हें नगर निगम ने ‘नो फ्लैक्स जोन’ घोषित कर रखा है। ऐसे में निगम की निगरानी और कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

छह प्रमुख मार्गों पर फ्लैक्स प्रतिबंधित

नगर निगम ने आउटडोर एडवरटाइजमेंट पॉलिसी के तहत बिना अनुमति, शुल्क या निर्धारित मापदंडों के विपरीत पोस्टर-बैनर लगाने पर जुर्माने का प्रावधान किया है। शहर के 10 जोनों में पोस्टर-बैनर लगाने के लिए निर्धारित स्थल भी चिन्हित किए गए हैं।

इसके अलावा छह प्रमुख मार्गों को नो फ्लैक्स जोन घोषित किया गया है। इनमें महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर, तेलीबांधा थाना चौक से टाटीबंध, कोतवाली से जयस्तंभ चौक, सिविल लाइन और पचपेड़ी नाका से लालपुर ओवरब्रिज तक के प्रमुख मार्ग शामिल हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर सरकारी फ्लैक्स को छूट दी गई है।

नो फ्लैक्स रूट पर ही लगे बैनर

जमीनी हकीकत निगम के दावों से अलग नजर आ रही है। महिला थाना से बूढ़ेश्वर मंदिर जाने वाले नो फ्लैक्स मार्ग पर बिजली के खंभों में कवि सम्मेलन के फ्लैक्स और ज्वेलर्स के व्यावसायिक विज्ञापन लगे हुए हैं।

इसी तरह भगत सिंह चौक से टाटीबंध मार्ग पर नुआखाई, भागवत, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर और फिल्मों के प्रचार से जुड़े पोस्टर-बैनर नजर आ रहे हैं। प्रतिबंधित मार्ग पर लंबे समय तक इन फ्लैक्स के लगे रहने से निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सड़क के बीच सरकारी फ्लैक्स, विजिबिलिटी पर असर

आकाशवाणी चौक से खजाना चौक तक संस्कृति विभाग के सरकारी फ्लैक्स सड़क के बीच लगाए गए हैं। इनकी वजह से राहगीरों और वाहन चालकों की विजिबिलिटी प्रभावित होने की स्थिति बन रही है।

वहीं मेकाहारा अस्पताल से भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाले मार्ग पर नेताओं के जन्मदिन और बधाई संदेश वाले फ्लैक्स खंभों और सड़क किनारे झूलते नजर आ रहे हैं। इनमें से कई फ्लैक्स एक तरफ झुके हुए हैं, जिससे इनके गिरने का खतरा भी बना हुआ है।

MG रोड पर भी बैनर ही बैनर

MG रोड पर गणेश चतुर्थी और राजनेताओं की बधाई से जुड़े पोस्टर और फ्लैक्स जगह-जगह लगे हैं। एक व्यावसायिक बिल्डिंग पर करीब 10×20 फीट का विशाल बधाई बैनर लगाया गया है।

तेज हवा या बारिश के दौरान इसके फटकर या गिरकर सड़क पर आने की स्थिति में राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नो फ्लैक्स जोन घोषित होने के बावजूद खंभों और बिल्डिंगों पर फ्लैक्स कैसे लगाए जा रहे हैं और निगम की निगरानी कहां चूक रही है?

नेता प्रतिपक्ष ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

नगर निगम की कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निगम कार्रवाई में भेदभाव करता है।

उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी द्वारा अपनी दुकान के सामने पोस्टर लगाने पर कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पोस्टर-बैनर लगे होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही।

आकाश तिवारी ने कहा कि लटकते पोस्टरों और बैनरों की वजह से पहले भी कई लोग दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। ऐसे में निगम को केवल औपचारिक कार्रवाई के बजाय जिम्मेदारी तय करते हुए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

निगम का दावा- कार्रवाई जारी

नगर निगम की ओर से कहा गया है कि अवैध फ्लैक्स और पोस्टर के खिलाफ कार्रवाई जारी है। संबंधित लोगों तक पहुंचकर कार्रवाई की जा रही है। निगम जल्द ही फ्लैक्स और पोस्टर प्रिंटर्स की बैठक भी आयोजित करेगा।

साथ ही फ्लैक्स पर संबंधित प्रिंटर और अन्य जरूरी जानकारी अनिवार्य करने की बात कही गई है। हालांकि सवाल यह है कि जब नो फ्लैक्स जोन में ही खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है, तो निगरानी तंत्र कहां है?

विशेष अभियान की घोषणा के बाद कितने लोगों पर जुर्माना लगाया गया और कितने फ्लैक्स हटाए गए, इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आया है।

हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

शहर में नियमों के बावजूद लगातार लटकते फ्लैक्स और बैनर अब केवल शहर की सुंदरता का मुद्दा नहीं रह गए हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुके हैं।

यदि तेज हवा में कोई बड़ा फ्लैक्स गिरता है या सड़क पर लगे बैनर की वजह से वाहन चालक की विजिबिलिटी प्रभावित होने के कारण हादसा होता है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? केवल नो फ्लैक्स जोन घोषित करने से नियम लागू नहीं होते। जरूरत है कि निगम जमीन पर भी उतनी ही सख्ती दिखाए, जितनी उसके नियमों और कागजों में दिखाई देती है।

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