ट्रंप के 200% टैरिफ से भारतीय दवा कंपनियों पर दबाव, लेकिन सस्ती जेनेरिक दवाओं की बढ़त बरकरार रहने की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयातित जेनेरिक दवाओं पर 200 फीसदी तक टैरिफ लगाने की प्रस्तावित योजना से भारतीय दवा कंपनियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जेनेरिक दवाओं की कम कीमत उन्हें अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद कर सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की कई जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना तक सस्ती हैं। ऐसे में भारी टैरिफ लगने के बाद भी उनकी कीमत अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती है। अतिरिक्त लागत का असर सीधे भारतीय कंपनियों पर पड़ने के बजाय अमेरिकी अस्पतालों, बीमा कंपनियों और मरीजों पर पड़ सकता है।
2029 से लागू हो सकता है 200% टैरिफ
ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव के अनुसार, आयातित जेनेरिक दवाओं पर 1 अगस्त 2028 तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद एक साल तक 100 फीसदी टैरिफ और अगस्त 2029 से 200 फीसदी टैरिफ लागू करने की योजना है। यह नियम उन कंपनियों पर लागू होगा जो अमेरिका में उत्पादन शुरू नहीं करेंगी।
भारत पर सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने दुनिया भर में 25.8 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया, जिसमें से करीब 9.7 अरब डॉलर की दवाएं केवल अमेरिका भेजी गईं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा दवा निर्यात बाजार है। अमेरिकी बाजार में इस्तेमाल होने वाली लगभग 47 फीसदी जेनेरिक दवाएं भारतीय कंपनियां उपलब्ध कराती हैं।
सभी कंपनियों पर असर एक जैसा नहीं
GTRI का कहना है कि महंगी जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं पर टैरिफ का असर ज्यादा पड़ सकता है। वहीं, कम कीमत वाली जरूरी जेनेरिक दवाएं भारत की लागत संबंधी बढ़त के कारण बाजार में अपनी स्थिति बनाए रख सकती हैं।
कई भारतीय कंपनियों के अमेरिका में प्लांट
सन फार्मा, सिप्ला, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, ऑरोबिंदो फार्मा और जाइडस लाइफसाइंसेज जैसी कई भारतीय कंपनियों के अमेरिका में पहले से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं। इससे उन्हें संभावित टैरिफ के असर को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
चीन पर निर्भरता भी चिंता
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अभी भी दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले लगभग 70 फीसदी केमिकल आधारित एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) और करीब 90 फीसदी बायोलॉजिक इनपुट के लिए चीन पर निर्भर है। GTRI ने भारत को API उत्पादन बढ़ाने, चीन पर निर्भरता कम करने और यूरोप, अफ्रीका, एशिया व लैटिन अमेरिका जैसे नए बाजारों में निर्यात बढ़ाने की सलाह दी है।

