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बुलेट ट्रेन में आत्मनिर्भर बनेगा भारत, 7,000 किमी नेटवर्क के लिए तैयार होगा अपना कंट्रोल सिस्टम

नई दिल्ली। भारत बुलेट ट्रेन तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारतीय रेलवे देश का अपना हाई-स्पीड रेल सिग्नलिंग और कंट्रोल सिस्टम विकसित कर रहा है, जिसे भारत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (BTCS) नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में बनने वाले करीब 7,000 किलोमीटर लंबे बुलेट ट्रेन नेटवर्क के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, BTCS को ओपन-सोर्स तकनीक पर विकसित किया जाएगा। इससे इसकी लागत कम होगी और इसे अलग-अलग हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा। भविष्य में इस तकनीक को दूसरे देशों को भी उपलब्ध कराने की संभावना जताई गई है।

इस सिस्टम को विकसित करने में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से मिले अनुभव का उपयोग किया जाएगा। इस परियोजना में फिलहाल यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) लेवल-2 लगाया जा रहा है, जो 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में सक्षम है।

रेलवे का लक्ष्य 2027 तक नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के डिजाइन और रूट प्लान को अंतिम रूप देना है। इसके बाद देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जाएगा।

रेलवे का मानना है कि स्वदेशी कंट्रोल सिस्टम तैयार होने से भारतीय कंपनियों को हाई-स्पीड रेल तकनीक और उपकरण बनाने का बड़ा अवसर मिलेगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत इस क्षेत्र में तकनीकी रूप से और मजबूत बनेगा।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना जापान के सहयोग से बनाई जा रही है। हालांकि, इसमें जापानी डिजिटल ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम की जगह यूरोपियन ETCS लेवल-2 तकनीक अपनाई गई है। रेलवे का कहना है कि भविष्य में यदि जापानी कंपनियां बेहतर प्रस्ताव देती हैं, तो उनके सिस्टम पर भी विचार किया जा सकता है।

भारतीय रेलवे का लक्ष्य केवल बुलेट ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि उससे जुड़ी अहम तकनीकों में भी आत्मनिर्भर बनना है। BTCS को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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