दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP प्रदर्शन की NIA जांच की मांग वाली याचिका खारिज की

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP के संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की NIA जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि NIA से जांच कराने का फैसला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसके लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि किसी मामले की जांच NIA को सौंपने का निर्णय अदालत नहीं, बल्कि केंद्र सरकार लेती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले एफआईआर दर्ज होती है, फिर राज्य सरकार की रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर केंद्र सरकार तय करती है कि मामला NIA को सौंपा जाए या नहीं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि उन्हें इस संबंध में कोई मांग रखनी है तो वे संबंधित अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि केवल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। तथ्यों की जांच संबंधित जांच एजेंसी ही करेगी।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी NIA कानून की प्रक्रिया पर अदालत की व्याख्या से सहमति जताई।
याचिका में संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच NIA, CBI या विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि कौन-सी एजेंसी जांच करेगी, इसका फैसला कानून के अनुसार संबंधित सरकार और सक्षम प्राधिकारी ही करेंगे।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को हुए संसद मार्च के दौरान हिंसा और झड़प के बाद कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन्हीं घटनाओं की NIA जांच की मांग को लेकर यह जनहित याचिका दायर की गई थी।

