अयोध्या और दिल्ली में गोलीकांड पर सियासत तेज, रामगोपाल यादव ने सरकार से पूछा- दोहरा मापदंड क्यों?

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अयोध्या में हुई गोलीबारी और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई का जिक्र करते हुए सरकार से दोहरे मापदंड को लेकर सवाल किया। उनका कहना है कि अयोध्या की घटना के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराया गया था, जबकि दिल्ली की घटना में जिम्मेदारी प्रशासन की बताई जा रही है।
रामगोपाल यादव ने उठाया सवाल
रामगोपाल यादव ने कहा कि जब अयोध्या में गोली चली थी, तब मुलायम सिंह यादव को गोली चलाने के आदेश के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के मामले में सरकार की ओर से प्रशासन और अधिकारियों की जिम्मेदारी बताई जा रही है। उन्होंने कहा कि दोनों मामलों में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने पर सवाल उठता है।
इससे पहले समाजवादी पार्टी के सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के मुताबिक गोली चलाने का आदेश किसी मंत्री की ओर से नहीं दिया जाता और यह आदेश प्रशासनिक स्तर पर जारी होता है, तो अयोध्या की घटना में मुलायम सिंह यादव को जिम्मेदार ठहराने का आधार क्या था। उन्होंने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
सरकार ने गोली चलने के आरोपों पर क्या कहा
एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार का पक्ष रखा था। उन्होंने कहा कि जब गोली चली ही नहीं तो गोली चलाने के आदेश का सवाल भी नहीं उठता। उनके मुताबिक, गोली चलाने का आदेश किसी मंत्री की ओर से नहीं दिया जाता, बल्कि मजिस्ट्रेट या संबंधित अधिकारी इस तरह का आदेश जारी करता है।
जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। सरकार की ओर से दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने के आरोपों को खारिज किया गया।
राहुल गांधी के बयान के बाद बढ़ा विवाद
इससे पहले राहुल गांधी ने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित बर्बरता को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान उनके बयान के बाद सदन में हंगामा हुआ था। राहुल गांधी ने इस कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय को जिम्मेदार ठहराते हुए मामले की जांच की मांग की थी।
राहुल गांधी ने यह भी मांग की थी कि पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में उच्च अधिकार प्राप्त समिति से जांच कराई जाए। उनके बयान के बाद सत्तापक्ष के सांसदों ने विरोध जताते हुए उनसे माफी की मांग की थी। अब समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों से इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।

