राज्यों की कैबिनेट में महिलाओं की भागीदारी असमान, 6 राज्यों में एक भी महिला मंत्री नहीं

देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात लगातार होती रही है, लेकिन राज्यों की मंत्रिपरिषदों की तस्वीर अब भी असंतुलित है। देश के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी महिला मंत्री नहीं है, जबकि पश्चिम बंगाल सबसे अधिक सात महिला मंत्रियों के साथ शीर्ष पर है।
आधिकारिक सरकारी वेबसाइटों के आधार पर तैयार आंकड़ों के अनुसार गोवा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, सिक्किम और पुड्डुचेरी की कैबिनेट में फिलहाल कोई महिला मंत्री नहीं है। इसके अलावा नौ राज्यों में केवल एक-एक महिला मंत्री को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है।
कर्नाटक में 3 अगस्त 2026 को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रिपरिषद में कुल 34 मंत्री हो गए, लेकिन इनमें एक भी महिला शामिल नहीं है। महिला एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा का नाम संभावित मंत्रियों की सूची में था, लेकिन शपथ से पहले उन्हें अंतिम सूची से हटा दिया गया।
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार में सात महिला मंत्री हैं, जो देश में सबसे अधिक हैं। उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में छह महिला मंत्री शामिल हैं।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की कैबिनेट में पांच-पांच महिला मंत्री हैं। बिहार और तमिलनाडु में चार-चार महिलाओं को मंत्रिपरिषद में जगह मिली है। गुजरात में तीन महिला मंत्री हैं, जबकि हरियाणा, झारखंड और राजस्थान में दो-दो महिला मंत्री हैं। छत्तीसगढ़ में लक्ष्मी राजवाड़े और जम्मू-कश्मीर में सकीना मसूद इटू अपनी-अपनी सरकारों में एकमात्र महिला मंत्री हैं।
केंद्र सरकार की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 72 सदस्यीय मंत्रिपरिषद में फिलहाल सात महिला मंत्री हैं। पिछली मंत्रिपरिषद में यह संख्या 12 थी, जो अब घटकर सात रह गई है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्यों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी समान नहीं है। कई राज्यों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है और मंत्रिमंडल गठन के दौरान राजनीतिक, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण अक्सर महिला प्रतिनिधित्व पर भारी पड़ जाते हैं।

