संसद परिसर में सांसदों का रील्स प्रेम बढ़ा, सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने को लेकर उठे सवाल

संसद का मानसून सत्र जहां कई अहम मुद्दों पर राजनीतिक बहस और हंगामे का गवाह बन रहा है, वहीं इसी दौरान कुछ सांसद संसद परिसर में रील्स बनाते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले कई सांसदों ने परिसर में वीडियो बनाकर उन्हें इंस्टाग्राम समेत अन्य प्लेटफॉर्म पर साझा किया है। इसके चलते संसद की गरिमा, सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका और जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक आचरण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि रील्स बनाने वाले सांसदों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। इनमें सायनी घोष, महुआ मोइत्रा, राघव चड्ढा, इमरान प्रतापगढ़ी और रवि किशन जैसे नाम शामिल हैं। संसद परिसर में बनाए गए कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए हैं।
सांसदों के रील्स सोशल मीडिया पर हुए वायरल
सायनी घोष ने संसद परिसर में बारिश के दौरान रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा की थी। वीडियो में वह मानसून के मौसम का आनंद लेती नजर आईं। पोस्ट सामने आने के बाद इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा, हालांकि कुछ यूजर्स ने संसद परिसर में इस तरह का वीडियो बनाने को लेकर सवाल भी उठाए।
महुआ मोइत्रा भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहती हैं और उन्होंने संसद परिसर में रील्स बनाए हैं। इसी तरह राघव चड्ढा और इमरान प्रतापगढ़ी के भी संसद परिसर से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ चुके हैं। बीजेपी सांसद और अभिनेता रवि किशन भी सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहते हैं और संसद परिसर में बनाए गए वीडियो साझा कर चुके हैं।
रील्स के बढ़ते चलन पर बहस
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में रील्स को 21वीं सदी का नशा बताया था और युवाओं को सोशल मीडिया की दुनिया में उलझाए जाने का आरोप लगाया था। ऐसे में सांसदों के खुद रील्स बनाने को लेकर राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस शुरू हो गई है।
समर्थकों का तर्क है कि जनप्रतिनिधियों का सोशल मीडिया के जरिए लोगों से जुड़ना संवाद का आधुनिक माध्यम है। वहीं आलोचकों का कहना है कि संसद जैसे संवैधानिक संस्थान के परिसर में सोशल मीडिया कंटेंट तैयार करते समय मर्यादा और गंभीरता का ध्यान रखा जाना चाहिए। सांसदों की बढ़ती सोशल मीडिया सक्रियता के बीच यह बहस भी तेज हो रही है कि सार्वजनिक जीवन में डिजिटल लोकप्रियता और संस्थागत गरिमा के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए।



