बाबा रामदेव बोले- धर्मांतरण के लिए लालच और भ्रम फैलाने का आरोप, कहा- ‘न हिंदू खतरे में है, न मुस्लिम और न ईसाई’

रायपुर। योग गुरु बाबा रामदेव ने धर्मांतरण, धार्मिक भेदभाव, देश की अर्थव्यवस्था और पड़ोसी देशों में हिंदुओं की स्थिति को लेकर कई बातें कहीं। रायपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति और धर्म बेहद प्राचीन हैं और इनमें ऐसी कोई कमी नहीं है, जिसके कारण किसी को धर्म बदलने की जरूरत पड़े।
बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म में कुछ लोगों की सोच में ऊंच-नीच और भेदभाव हो सकता है, लेकिन इसे धर्म की कमी नहीं माना जा सकता। उन्होंने भगवान राम, कृष्ण, हनुमान और शिव के आदर्शों को जीवन में उतारने की बात कही।
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धर्मांतरण को लेकर क्या बोले?
धर्मांतरण पर बाबा रामदेव ने आरोप लगाया कि इतिहास में कुछ लोगों ने लालच, डर, चमत्कार और भ्रम फैलाकर लोगों का धर्म परिवर्तन कराया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में किसी तरह की कमी नहीं है और लोगों को अपने धर्म को जीवन में धारण करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सत्ता तंत्र को धर्म और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहयोग करना चाहिए। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया, ताकि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
‘न हिंदू खतरे में है, न मुस्लिम और न ईसाई’
छत्तीसगढ़ में ईसाइयों के साथ कथित प्रताड़ना के कांग्रेस के आरोपों पर भी बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक मुद्दों को लेकर होने वाले विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गए हैं। उनके मुताबिक, देश में किसी भी धर्म के व्यक्ति को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न हिंदू धर्म खतरे में है, न मुस्लिम और न ही ईसाई धर्म। देश को धार्मिक विवादों के बजाय आर्थिक मजबूती, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
भारत की अर्थव्यवस्था पर जोर
बाबा रामदेव ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका, चीन और रूस के बराबर सम्मान और दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने भारतीय रुपये को भी मजबूत बनाने पर जोर दिया।
पाकिस्तान-बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोले
पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं पर कथित अत्याचार को लेकर बाबा रामदेव ने इसे क्रूरता बताया। उन्होंने कहा कि इन देशों में हिंदुओं के साथ ज्यादतियां हुई हैं।
भारत और पड़ोसी देशों के भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि एक दिन बांग्लादेश, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत एक साथ होंगे। इसके लिए उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि देश को धार्मिक विवादों से ऊपर उठकर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।



