BRICS देशों के बीच व्यापार आसान करने की भारत की पहल, पीयूष गोयल बोले- बाजार खोलें, गैर-टैरिफ बाधाएं घटाएं

नई दिल्ली। भारत ने BRICS देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को आसान बनाने की दिशा में बड़ी पहल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को BRICS देशों से एक-दूसरे के लिए अपने बाजार ज्यादा खोलने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यापार में आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के साथ-साथ पेमेंट सिस्टम को भी आपस में जोड़ना जरूरी है।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum 2026 को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि सदस्य और पार्टनर देशों के बीच व्यापार अधिक मजबूत और भरोसेमंद होना चाहिए। उन्होंने ऐसी सप्लाई चेन बनाने पर जोर दिया, जो दोनों दिशाओं में काम करे और किसी भी देश के व्यापारिक विकास में बाधा न बने।
टैरिफ से ज्यादा बड़ी चुनौती गैर-टैरिफ बाधाएं
पीयूष गोयल ने कहा कि व्यापार में सिर्फ आयात शुल्क यानी टैरिफ ही चुनौती नहीं है। जटिल नियम, मंजूरियां और अलग-अलग प्रक्रियाएं कई बार कारोबार की लागत बढ़ा देती हैं।
उन्होंने BRICS देशों से इन गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और नियमों को आसान बनाने की अपील की। साथ ही कस्टम क्लीयरेंस की प्रक्रिया को तेज करने पर भी जोर दिया, ताकि कंपनियों के लिए दूसरे BRICS देशों में अपने उत्पाद पहुंचाना आसान हो सके।
भारत इस समय BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और अध्यक्षता के दौरान सदस्य तथा पार्टनर देशों के बीच व्यापार एवं आर्थिक सहयोग बढ़ाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
BRICS में UPI और लोकल करेंसी को बढ़ावा
गोयल ने सीमा पार कारोबार में डिजिटल पेमेंट और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत भी बताई। उन्होंने भारत के UPI को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि UPI फिलहाल 11 देशों में स्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने BRICS देशों से अपने-अपने पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की अपील की। साथ ही स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भुगतान की प्रक्रिया आसान होने और डॉलर पर निर्भरता कम होने की संभावना है।
गोयल के मुताबिक, भारत में UPI के जरिए हर साल 250 अरब से ज्यादा ट्रांजैक्शन होते हैं। उन्होंने इसे भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम की बड़ी सफलता बताया।
प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान बनाने पर जोर
BRICS देशों के बीच सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए पेशेवरों की आवाजाही आसान करने की जरूरत भी गोयल ने बताई।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों में प्रोफेशनल डिग्री और योग्यताओं की मान्यता की प्रक्रिया को आसान बनाया जाना चाहिए। इससे एक BRICS देश के पेशेवरों के लिए दूसरे सदस्य देशों में काम करने और सेवाएं देने के अवसर बढ़ सकते हैं।
ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा में बड़े अवसर
गोयल ने कहा कि भारत के पास BRICS देशों में इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की बड़ी संभावनाएं हैं। इसके अलावा कृषि, ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स और सर्विस सेक्टर में भी सहयोग के कई अवसर मौजूद हैं।
उन्होंने इन क्षेत्रों में नई तकनीक और इनोवेशन के लिए साझेदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
BRICS स्टार्टअप्स को जोड़ने का सुझाव
केंद्रीय मंत्री ने BRICS देशों के स्टार्टअप इकोसिस्टम को आपस में जोड़ने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि एग्री-टेक कंपनियां मिलकर किसानों के लिए नई तकनीक और समाधान विकसित कर सकती हैं।
खाद्य सुरक्षा को भी BRICS देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि आपसी साझेदारी और तकनीकी सहयोग के जरिए इस क्षेत्र में नए समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, भारत BRICS की अध्यक्षता के दौरान व्यापार बाधाओं को कम करने, डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने, लोकल करेंसी में कारोबार बढ़ाने और नए क्षेत्रों में आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर दे रहा है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए BRICS के बड़े बाजारों में कारोबार और निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं।



