टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का एक्सटेंशन, IPO प्रक्रिया में निभाएंगे अहम भूमिका

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल मिल गया है। कंपनी के बोर्ड ने गुरुवार को उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर दोबारा नियुक्त करने को मंजूरी दी। इसके साथ ही टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया गया है। ऐसे में चंद्रशेखरन की भूमिका कंपनी के प्रस्तावित आईपीओ की तैयारी में अहम हो सकती है।
बोर्ड ने दी दोबारा नियुक्ति को मंजूरी
एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को पूरा होना था। इससे पहले उन्होंने 12 अगस्त को संकेत दिया था कि वे तीसरे कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की इच्छा नहीं रखते। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद उनका कार्यकाल पांच साल के लिए बढ़ाया गया है।
टाटा संस के बोर्ड ने होल्डिंग कंपनी की लिस्टिंग को भी मंजूरी दी है। इसके चलते कंपनी के भविष्य के कॉरपोरेट ढांचे और आईपीओ से जुड़ी तैयारियों में चंद्रशेखरन की भूमिका महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।
टाटा ट्रस्ट्स के पास बड़ी हिस्सेदारी
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की कुल हिस्सेदारी करीब 66 प्रतिशत बताई जाती है। यही वजह है कि कंपनी के चेयरमैन और शीर्ष प्रबंधन से जुड़े फैसलों में ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के निदेशक नोएल टाटा ने फरवरी में हुई बोर्ड बैठक के दौरान चंद्रशेखरन के प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल का विरोध किया था। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया था कि नोएल टाटा नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में थे।
लिस्टिंग के फैसले से बढ़ी जिम्मेदारी
टाटा संस की लिस्टिंग को मंजूरी मिलने के बाद कंपनी के लिए यह एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट प्रक्रिया होगी। आईपीओ की तैयारियों, नियामकीय प्रक्रियाओं और कंपनी की रणनीति को आगे बढ़ाने में शीर्ष नेतृत्व की भूमिका अहम रहेगी।
वहीं, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने पहले चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने के फैसले का सम्मान करने की बात कही थी। अब बोर्ड की मंजूरी के बाद टाटा संस में नेतृत्व और लिस्टिंग से जुड़े अगले कदमों पर नजर रहेगी।



