ADR रिपोर्ट: देश के 31 मुख्यमंत्रियों में 14 पर आपराधिक मामले, 11 पर गंभीर आरोप दर्ज

देश के मुख्यमंत्रियों की आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति, शिक्षा और अन्य विवरणों पर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच (NEW) की ताजा रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 31 मुख्यमंत्रियों के चुनावी हलफनामों के विश्लेषण पर आधारित इस रिपोर्ट के अनुसार, 14 मुख्यमंत्रियों यानी करीब 45 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इनमें से 11 मुख्यमंत्रियों पर हत्या के प्रयास, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके बाद पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी पर 29 मामले, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार पर 19-19 मामले दर्ज हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में ऐसे अपराध शामिल हैं, जिनमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है या जो हत्या, अपहरण, भ्रष्टाचार, महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध जैसे मामलों से जुड़े हैं।
संपत्ति के मामले में कर्नाटक के डी.के. शिवकुमार सबसे आगे हैं। उनकी घोषित संपत्ति 1,413 करोड़ रुपये से अधिक है। दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू हैं, जिनकी संपत्ति 931 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। तमिलनाडु के सी. जोसेफ विजय और अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू भी अरबपति मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल हैं। वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 55.24 लाख रुपये है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश के 11 मुख्यमंत्रियों पर एक करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी है। सबसे अधिक 265 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज डी.के. शिवकुमार पर है, जबकि पेमा खांडू और हिमंत बिस्वा सरमा भी अधिक देनदारी वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं।
शिक्षा के स्तर पर अधिकांश मुख्यमंत्री उच्च शिक्षित पाए गए हैं। 31 में से नौ मुख्यमंत्री पोस्ट ग्रेजुएट, छह प्रोफेशनल ग्रेजुएट और तीन डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हैं। वहीं, देश के 31 मुख्यमंत्रियों में केवल एक महिला मुख्यमंत्री हैं, जबकि शेष 30 पुरुष हैं। आयु वर्ग के आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 17 मुख्यमंत्री 51 से 60 वर्ष की आयु के हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी संख्या में मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामलों और अत्यधिक संपत्ति की मौजूदगी भारतीय राजनीति की मौजूदा तस्वीर को दर्शाती है। वहीं, महिला प्रतिनिधित्व अभी भी काफी सीमित है, जबकि शिक्षा के मामले में अधिकांश मुख्यमंत्री उच्च शिक्षित हैं।

