जंतर-मंतर हिंसा के बाद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, एक समान गाइडलाइंस बनाने की मांग

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुई हिंसा का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिस अधिकारियों के परिजनों ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर पुलिस बल के लिए मजबूत कानूनी सुरक्षा और स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर हिंसा का सामना करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए।
याचिका एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट, एएसआई संदीप, कांस्टेबल धीरज और एएसआई हेमेंद्र राठी के परिजनों की ओर से दायर की गई है। ये सभी जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी निभाते समय घायल हुए थे। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का प्रभावी संरक्षण मिले।
याचिका में अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़काने या उकसाने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए देशभर में लागू होने वाली समान गाइडलाइंस तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिस बल को कई बार हिंसक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था का अभाव है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश भविष्य में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यह याचिका ऐसे समय दाखिल की गई है, जब सुप्रीम कोर्ट सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग से जुड़े मामलों की भी सुनवाई कर रहा है। हाल ही में अदालत ने कहा था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और इसे छीना नहीं जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार किया जा सकता है, ताकि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

