छत्तीसगढ़ में चुनावी मोड में BJP-कांग्रेस, 2028 की तैयारी शुरू, नए प्रभारियों के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस को 35 सीटें मिली थीं। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भाजपा का वोट शेयर 46.27% और कांग्रेस का 42.23% रहा था।
ऐसे में 2028 के चुनाव से पहले दोनों दलों के लिए अपने-अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
नए प्रभारियों के सामने लंबी तैयारी का समय
भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ का प्रदेश प्रभारी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने सांसद सुखदेव भगत को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी है।
नए प्रभारियों के सामने प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश संगठन, जिला इकाइयों और विधानसभा स्तर की गतिविधियों के बीच समन्वय बनाने की जिम्मेदारी होगी।
27 महीने का समय दोनों दलों को संगठनात्मक तैयारियों के लिए लंबा अवसर देता है। इस दौरान बूथ स्तर की गतिविधियां, विधानसभा क्षेत्रवार राजनीतिक समीकरण, स्थानीय मुद्दे और कार्यकर्ताओं की सक्रियता जैसे विषय महत्वपूर्ण रहेंगे।
2023 के चुनाव में क्या रहा था परिणाम?
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा ने 90 सीटों में से 54 सीटें जीती थीं। कांग्रेस ने 35 सीटों पर जीत दर्ज की थी। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को 46.27% और कांग्रेस को 42.23% वोट मिले थे।
इन आंकड़ों के आधार पर दोनों दलों के सामने अलग-अलग संगठनात्मक और राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं। भाजपा सत्ता में है, जबकि कांग्रेस विधानसभा में विपक्ष की भूमिका में है।
2028 के चुनाव तक इन दोनों दलों को अपने मौजूदा राजनीतिक आधार को बनाए रखने के साथ-साथ उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी काम करना होगा जहां पिछली बार अपेक्षित प्रदर्शन नहीं रहा।
भाजपा के सामने क्या चुनौतियां?
2023 में भाजपा ने 54 सीटों पर जीत दर्ज की थी। ऐसे में पार्टी के लिए सरकार और संगठन के बीच समन्वय बनाए रखना एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा।
भाजपा संगठन के सामने सरकार की योजनाओं और पार्टी के कार्यक्रमों को कार्यकर्ताओं के माध्यम से जमीनी स्तर तक पहुंचाने, बूथ स्तर की गतिविधियों को सक्रिय रखने और अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा करने जैसे विषय रहेंगे।
पार्टी के लिए 2023 में जिन 36 सीटों पर जीत नहीं मिली थी, वहां भी संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाना एक प्रमुख पहलू हो सकता है।
भाजपा की प्रमुख प्राथमिकताएं
सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय
बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय रखना
2023 में हारी विधानसभा सीटों की समीक्षा
स्थानीय कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच समन्वय
विधानसभा क्षेत्रवार राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन
सरकारी योजनाओं और पार्टी कार्यक्रमों की जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचाना
भाजपा फिलहाल सेवा संकल्प अभियान जैसे कार्यक्रमों के जरिए भी संगठनात्मक और जनसंपर्क गतिविधियां चला रही है।
कांग्रेस के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
कांग्रेस के लिए 2028 तक संगठन को लगातार सक्रिय रखना महत्वपूर्ण होगा। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 35 सीटों पर जीत मिली थी और उसका वोट शेयर 42.23% रहा था।
नई प्रदेश प्रभारी व्यवस्था के बीच कांग्रेस के सामने जिला, ब्लॉक और बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने की चुनौती रहेगी।
पार्टी ने संगठन सृजन अभियान के जरिए जिला और ब्लॉक स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया है।
कांग्रेस के सामने विधानसभा स्तर पर स्थानीय नेतृत्व के बीच समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विपक्ष की भूमिका से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने जैसे विषय रहेंगे।
कांग्रेस की प्रमुख प्राथमिकताएं
जिला और ब्लॉक स्तर के संगठन को सक्रिय करना
बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम मजबूत करना
स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय
विधानसभा क्षेत्रवार मुद्दों को उठाना
कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाना
विपक्ष के तौर पर सरकार से जुड़े मुद्दों पर लगातार सवाल उठाना
कांग्रेस स्मार्ट मीटर, सड़क और स्थानीय स्तर से जुड़े अन्य मुद्दों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना रही है। हालांकि, इन मुद्दों का चुनावी प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम और मतदाताओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
27 महीने में क्या-क्या बदलेगा?
2028 के विधानसभा चुनाव में अभी लंबा समय बाकी है। ऐसे में मौजूदा राजनीतिक स्थिति को चुनाव के समय की स्थिति के समान मानना उचित नहीं होगा। अगले दो वर्षों में सरकार के कामकाज, विपक्ष की रणनीति, स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक बदलाव और राजनीतिक गठजोड़ समेत कई परिस्थितियां बदल सकती हैं।
इसी वजह से फिलहाल दोनों दलों के लिए संगठन को मजबूत करना और विधानसभा स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों को समझना प्रमुख कार्यों में शामिल रहेगा।
नए प्रभारियों के सामने भी यही चुनौती होगी कि वे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी संगठन की स्थिति को समझें और स्थानीय स्तर की राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाएं।
चुनावी तैयारी में संगठन क्यों अहम?
विधानसभा चुनाव में प्रदेश स्तर के मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण, स्थानीय नेतृत्व, संगठन की सक्रियता और उम्मीदवारों से जुड़े समीकरण अलग हो सकते हैं।
इसी कारण चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू करना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के नए प्रभारी आने वाले समय में प्रदेश के अलग-अलग जिलों और विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर संगठनात्मक स्थिति की समीक्षा कर सकते हैं।
2028 तक बदल सकती है राजनीतिक तस्वीर
छत्तीसगढ़ की राजनीति में 2028 विधानसभा चुनाव तक कई नए मुद्दे सामने आ सकते हैं। सरकार की नीतियां, विपक्ष की रणनीति, स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम और जनता से जुड़े मुद्दे चुनावी चर्चा को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने प्रदेश संगठन के स्तर पर नई जिम्मेदारियां तय कर दी हैं। अब नए प्रभारियों के सामने संगठन को समझने, नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाने और विधानसभा स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया होगी।
2028 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक तैयारियों ने प्रदेश की राजनीति में चुनावी गतिविधियों की शुरुआती हलचल जरूर बढ़ा दी है।



