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Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से बिगड़े हालात, कई जिलों में बाढ़ का खतरा; CM साय ने दिए अलर्ट रहने के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 48 घंटों से जारी भारी बारिश के चलते कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। नदी-नाले उफान पर हैं, निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है और कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बस्तर संभाग के कई हिस्सों में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। स्थिति को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है।

लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को बारिश और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत और सहायता उपलब्ध कराने को कहा है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से भी भारी बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि नागरिक अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील

सीएम साय ने लोगों से नदी-नालों, जलप्रपातों और उफनते जलस्रोतों के पास नहीं जाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पानी का बहाव अचानक बढ़ सकता है। जलमग्न पुल-पुलियों और सड़कों को पार करने की कोशिश न करें।

उन्होंने सुरक्षा के लिए लगाए गए बैरियर और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने, बिना जरूरत यात्रा से बचने और विशेष रूप से रात के समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहने और ऐसी स्थिति में तत्काल संबंधित विभाग, स्थानीय प्रशासन या पुलिस को सूचना देने को कहा गया है।

अभिभावकों से बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने तथा उन्हें अकेले बाहर नहीं जाने देने की अपील की गई है। पहाड़ी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश हैं। किसी भी आपात स्थिति में डायल 112 या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने को कहा गया है।

प्रदेश में सामान्य से ज्यादा बारिश

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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 25 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में इस मानसून अब तक सामान्य वर्षा का 100.1 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया है। 1 जून से 25 सितंबर के बीच राज्य में औसतन 1082.4 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले 10 वर्षों के आधार पर इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा 1081.5 मिमी है।

बीते 24 घंटों में प्रदेश में औसतन 52.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

जगदलपुर में बाढ़ जैसे हालात

बस्तर में लगातार बारिश के कारण इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। गोरियाबहार नाला उफान पर आने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। तिरिया, पोटनार और जगदलपुर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

अमागुड़ा इलाके में हाईवे से लगी निचली बस्ती में पानी भर गया है। लोगों को घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है। वन विभाग के कार्यालय की कई शाखाओं में भी पानी भरने से रिकॉर्ड भीगने की जानकारी सामने आई है।

इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित तोमर फार्म हाउस भी जलमग्न हो गया। वहां पांच लोगों के फंसे होने की सूचना पर SDRF की टीम रेस्क्यू के लिए पहुंची। फार्म हाउस परिसर में खड़ा एक ट्रक भी पानी में डूबा नजर आया।

कांकेर में दूध नदी उफान पर, स्कूल बंद

कांकेर जिले में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। आमाबेड़ा, कुरना सहित अंदरूनी इलाकों में जलस्तर बढ़ गया है और कई निचले क्षेत्रों में पानी भर गया है।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। दूध नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क करने के लिए स्थानीय स्तर पर मुनादी कराई। बारिश के कारण कई जगह पेड़ गिरने से यातायात प्रभावित हुआ, जिन्हें पुलिस और यातायात विभाग की टीमों ने हटाया।

कोंडागांव में पुल-पुलियों के ऊपर से बह रहा पानी

कोंडागांव में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। नदी-नालों के उफान पर आने से ग्रामीण इलाकों की कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं। पुल-पुलियों के ऊपर पानी बहने के कारण कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

सुरक्षा को देखते हुए 25 सितंबर को जिले के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल भेजे हैं और लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।

सुकमा में निचली बस्तियां खाली कराई जा रहीं

सुकमा जिले में लगातार बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कोंटा क्षेत्र की निचली बस्तियों को खाली कराया जा रहा है। डोंडरा पंचायत में कई घरों को खाली कराया जा रहा है। छिंदगढ़ क्षेत्र के ओलेर, नेतानार, किकिरपाल, तालनार, गुम्मा और गंजेनार समेत कई इलाकों में भी बाढ़ की स्थिति बताई गई है।

दोरनापाल-कोंटा और दोरनापाल-सुकमा के बीच नेशनल हाईवे पर कई जगह पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ है। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं।

गंगरेल और अन्य जलाशयों में बढ़ा जलस्तर

धमतरी में भारी बारिश के कारण जलाशयों में तेजी से पानी बढ़ा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गंगरेल जलाशय 98.14 प्रतिशत, मुरुमसिल्ली 100 प्रतिशत, दुधावा 97.21 प्रतिशत और सोढ़ुर 88.18 प्रतिशत भर चुका है।

गंगरेल में पानी की आवक 64,117 क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी है। बढ़ते जलस्तर के बीच गंगरेल बांध के गेट खोले गए हैं और पानी महानदी की ओर छोड़ा जा रहा है। रुद्री बैराज से भी पानी छोड़ा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर डिस्चार्ज बढ़ाया जा सकता है।

लगातार पानी छोड़े जाने से महानदी और आसपास के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी करते हुए लोगों को जलभराव और नदी-नालों से दूर रहने की सलाह दी है। जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है और त्रैमासिक परीक्षाओं को भी स्थगित किया गया है।

गरियाबंद में सिकासार बांध से छोड़ा जा रहा पानी

गरियाबंद जिले के देवभोग और अमलीपदर तहसील में भी लगातार बारिश हो रही है। तेल नदी, सुख तेल नदी समेत कई नाले उफान पर हैं। सिकासार बांध में करीब 87 प्रतिशत जलभराव के चलते सुरक्षा के मद्देनजर पानी छोड़ा जा रहा है।

कई इलाकों में घरों में पानी घुसने की स्थिति बन गई है। हजारों एकड़ खेतों के जलमग्न होने से किसानों की चिंता बढ़ी है। भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्रैमासिक परीक्षाएं भी रद्द कर दी हैं।

बालोद में भी जनजीवन प्रभावित

बालोद जिले में लगातार बारिश से नदियां, नाले और खेत-खलिहान लबालब हो गए हैं। सियादेवी वाटरफॉल भी पूरे उफान पर है। कई छोटे नालों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।

भारी बारिश को देखते हुए जिले के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है। कुछ स्कूलों में बच्चे पहुंच चुके थे, जिन्हें बाद में वापस घर भेज दिया गया।

प्रशासन की अपील—अफवाहों से बचें

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि मौसम और राहत से जुड़ी जानकारी के लिए केवल शासन-प्रशासन तथा अधिकृत स्रोतों पर भरोसा करें। अफवाहों और भ्रामक संदेशों को आगे न बढ़ाएं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जलभराव वाले क्षेत्रों, नदी-नालों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल 112 या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

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