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ऑस्ट्रेलिया-फिजी रक्षा समझौता: ‘ओशन ऑफ पीस’ डील से प्रशांत क्षेत्र में बदलेगा शक्ति संतुलन, चीन को बड़ा संदेश

ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख द्वीपीय देश फिजी ने ‘ओशन ऑफ पीस’ नाम से एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के साथ फिजी, अमेरिका, न्यूजीलैंड और पापुआ न्यू गिनी के बाद ऑस्ट्रेलिया का चौथा औपचारिक रक्षा सहयोगी बन गया है। माना जा रहा है कि यह समझौता प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलित जवाब है।

क्या है ‘ओशन ऑफ पीस’ समझौता?

इस रक्षा समझौते के तहत दोनों देश आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में एक-दूसरे का सहयोग करेंगे। इसके प्रमुख बिंदु हैं—

  • एक-दूसरे की सुरक्षा और रक्षा में सहयोग।
  • संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए साझा प्रतिबद्धता।
  • किसी भी सुरक्षा चुनौती की स्थिति में आपसी परामर्श।
  • प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए सहयोग।

चीन की बढ़ती मौजूदगी क्यों बनी चिंता?

साल 2022 में चीन और सोलोमन द्वीप के बीच हुए सुरक्षा समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ गई थी। आशंका जताई गई थी कि चीन भविष्य में वहां स्थायी सैन्य अड्डा बना सकता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता।

चीन ने प्रशांत द्वीपीय देशों में निवेश, बुनियादी ढांचा और आर्थिक सहायता के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया है। इसी रणनीति के तहत कई देशों ने ताइवान से संबंध तोड़कर ‘वन चाइना पॉलिसी’ का समर्थन किया।

फिजी ने चीन से दूरी क्यों बनाई?

पूर्व प्रधानमंत्री फ्रैंक बैनिमारामा के कार्यकाल में फिजी और चीन के संबंध काफी मजबूत हुए थे। लेकिन 2022 में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री सितिवेनी राबुका ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ पारंपरिक साझेदारी को प्राथमिकता दी।

राबुका पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिजी किसी भी स्थिति में चीन को अपने यहां स्थायी सैन्य अड्डा बनाने की अनुमति नहीं देगा।

ऑस्ट्रेलिया की नई रणनीति

सोलोमन द्वीप में चीन की सक्रियता के बाद ऑस्ट्रेलिया ने प्रशांत क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक पहल तेज कर दी। फिजी से पहले वह पापुआ न्यू गिनी, वानुअतु और तुवालु के साथ भी सुरक्षा समझौते कर चुका है। वानुअतु के साथ हुए समझौते में किसी भी विदेशी सैन्य अड्डे की स्थापना पर रोक का प्रावधान भी शामिल है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

1. QUAD और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मजबूती
ऑस्ट्रेलिया, भारत, अमेरिका और जापान के QUAD समूह का सदस्य है। प्रशांत क्षेत्र में चीन के प्रभाव को सीमित करने की यह पहल भारत के ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ विजन को भी मजबूत करती है।

2. समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा
प्रशांत महासागर वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है। इस क्षेत्र में स्थिरता से अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन और समुद्री व्यापार सुरक्षित रहेगा।

3. भारत की FIPIC पहल को समर्थन
भारत ‘फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC)’ के माध्यम से प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ स्वास्थ्य, आईटी, सौर ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता भारत के हित में है।

4. फिजी में भारतीय मूल के लोगों के हित
फिजी में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। वहां राजनीतिक और सुरक्षा स्थिरता भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया और फिजी के बीच हुआ ‘ओशन ऑफ पीस’ रक्षा समझौता प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों का संकेत है। इसे चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका प्रभाव भारत, QUAD और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीति पर भी पड़ सकता है।

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