ईरान पर अमेरिकी हमले तेज, ट्रंप की चेतावनी- नहीं रुके तो मिट जाएगा अस्तित्व

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखा और अमेरिका को सैन्य अभियान आगे बढ़ाना पड़ा, तो ईरान का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। वहीं, जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन और कुवैत की ओर हमले किए जाने का दावा किया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों के साथ-साथ समुद्री तट पर मौजूद रडार सिस्टम को निशाना बनाया। उनका आरोप है कि ईरान ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब तक संयम बरतता रहा है, लेकिन यदि हमले नहीं रुके तो सैन्य अभियान और व्यापक होगा, जिसके गंभीर परिणाम सामने आएंगे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रपति के निर्देश पर की गई। अमेरिका का दावा है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया था। इस जहाज में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल मौजूद था।
CENTCOM ने बताया कि हमलों के दौरान ईरान के निगरानी तंत्र, संचार नेटवर्क, एयर डिफेंस सिस्टम, ड्रोन स्टोरेज और समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता को निशाना बनाया गया। इससे पहले भी अमेरिका ईरान के मिसाइल, ड्रोन और तटीय रडार ठिकानों पर कार्रवाई कर चुका है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और यदि वह हिंसा का रास्ता अपनाता है तो उसका जवाब भी उसी भाषा में दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से हो सकता है, लेकिन हमलों की स्थिति में अमेरिका अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करेगा।
इन घटनाओं के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच बना नाजुक समझौता गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है।



