सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर रोक खारिज: हाईकोर्ट बोला- मनमानी पाबंदी संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के उस आदेश को खारिज कर दिया है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह रोक (government employees) लगा दी गई थी। कोर्ट ने इस पाबंदी को मनमाना और असंतुलित बताते हुए कहा कि सरकार किसी उद्देश्य को हासिल करने के लिए कर्मचारियों के अधिकारों पर इस तरह व्यापक रोक नहीं लगा सकती।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार की पीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार के तर्कों पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से लगाई गई पूर्ण पाबंदी उसके बताए उद्देश्यों के मुकाबले जरूरत से ज्यादा कठोर थी। अदालत ने इसकी तुलना “अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने” से की।
ऑस्ट्रेलिया में परीक्षा देने जाना चाहती थीं नर्सिंग ऑफिसर
मामला रोहतक स्थित PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी की याचिका से जुड़ा है। शीतल फरवरी 2021 से संस्थान में कार्यरत हैं। उन्हें ऑस्ट्रेलिया में एक पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा (government employees) में शामिल होना था। इसके लिए उन्हें वीजा भी मिल चुका था।
शीतल ने निर्धारित परीक्षा में शामिल होने के लिए अर्न्ड लीव मांगी थी। इसी बीच हरियाणा सरकार ने 10 जून को दिशा-निर्देश जारी कर सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। केवल गंभीर चिकित्सा उपचार के मामलों को छूट दी गई थी। इसी आधार पर शीतल की छुट्टी की अर्जी खारिज कर दी गई।
ईंधन बचाने के तर्क पर कोर्ट ने उठाया सवाल
सरकार की ओर से पाबंदी (government employees) के पीछे दिए गए तर्कों पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि किसी कर्मचारी को पेशेवर कौशल बढ़ाने या परीक्षा देने के लिए विदेश जाने से रोकने का ईंधन बचाने के लक्ष्य से क्या संबंध है।
अदालत ने सरकार का आदेश रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाकर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का निर्देश दिया। कोर्ट के इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों के विदेश यात्रा संबंधी अधिकारों पर लगाई गई व्यापक पाबंदी को बड़ा झटका लगा है।



