भूटान ग्लेशियर विस्फोट: बंगाल-असम में हाई अलर्ट, संकोश नदी के उफान से 12,000 लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट

दिल्ली। भूटान में गुरुवार देर रात शिंताफू ग्लेशियर झील फटने से भारी तबाही (FLOOD) हुई। पानी के तेज बहाव में यहां का मशहूर गर्म पानी का कुंड ‘गासा त्साचु’ पूरी तरह बह गया। पुनाखा-गासा हाईवे का एक हिस्सा भी टूट गया, जिससे वहां ट्रैफिक बंद करना पड़ा। हालांकि, अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है।
झील से निकले पानी के कारण संकोश नदी का जलस्तर बढ़ गया है। यह नदी भूटान से निकलकर असम और पश्चिम बंगाल की सीमा वाले इलाकों से गुजरती है और आगे ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। इसे देखते हुए दोनों राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद दोनों देशों में प्रशासनिक स्तर पर हाई अलर्ट जारी कर व्यापक बचाव और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
भूटान में तबाही का मंज़र
29 अक्टूबर की शाम वाकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी रिसाव और तेज बहाव (FLOOD) शुरू हुआ। शिंताफू झील भूटान की 17 सबसे संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलों में शुमार है। झील फटने के बाद निकली जलधारा मो छू नदी के जलग्रहण क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ी, जिसके बाद कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई।
गासा त्साचू हॉट स्प्रिंग की तबाही: भूटान का प्रसिद्ध गर्म पानी का कुंड (गासा त्साचू), जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच अपनी प्राकृतिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए जाना जाता था, पानी के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया। इसके आसपास बना इंफ्रास्ट्रक्चर भी क्षतिग्रस्त हो गया।
सड़क और हाईवे नेटवर्क ठप: बाढ़ के पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, चट्टानें और पेड़ बहकर सड़कों पर आ गए। पुनाखा-गासा हाईवे का एक प्रमुख हिस्सा टूट गया, जिससे इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया। इसके अलावा, लाया गांव को जोड़ने वाले रास्ते का एक हिस्सा बह जाने से गांवों का संपर्क कट गया।
सिंचाई और कृषि ढांचा क्षतिग्रस्त: पुनाखा जिले में स्थापित सोलर इरिगेशन लिफ्टिंग सिस्टम पानी में बह जाने से पूरी तरह ठप हो गया। इसके अलावा शिंगचाला नदी के उफान पर आने से आसपास के गांवों में पानी और मलबा घुस गया, जिससे फसलों और संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
गनीमत यह रही कि समय रहते जानकारी मिलने और प्रशासनिक मुस्तैदी के कारण अब तक किसी जनहानि या मौत की खबर नहीं आई है।
भूटान से भारत तक जलमार्ग: कैसे बना बाढ़ का खतरा?
भूटान की भौगोलिक स्थिति और नदियों का प्रवाह भारत के मैदानी इलाकों से सीधे जुड़ा हुआ है। शिंताफू ग्लेशियर झील का पानी सबसे पहले भूटान की मो छू नदी में पहुंचा। आगे चलकर मो छू नदी और फो छू नदी आपस में मिलकर पुनात्सांगछू नदी का निर्माण करती हैं।
पुनात्सांगछू नदी दक्षिण की ओर बहते हुए भारत की सीमा में प्रवेश करती है, जहाँ इसे संकोश नदी के नाम से जाना जाता है। संकोश नदी पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी तथा असम के कोकराझार और धुबरी जिलों के सीमावर्ती इलाकों से होकर गुजरती है। आगे चलकर यह नदी असम में शक्तिशाली ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। इसी जल मार्ग के कारण भूटान की झील से निकला जलस्तर भारत के मैदानी इलाकों के लिए बड़ा खतरा बन गया।
पश्चिम बंगाल और असम में हाई अलर्ट और राहत कार्य
संकोश नदी के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिम बंगाल और असम प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला:
12 हजार से अधिक लोग शिफ्ट: पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया। असम के धुबरी और कोकराझार के निचले इलाकों से भी करीब 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
रातभर बजे सायरन: तटीय और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने के लिए रातभर सायरन बजाए गए और मुनादी कराकर तुरंत घर खाली करने के निर्देश दिए गए।
NDRF और SDRF की तैनाती: स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय आपदा प्रबंधन टीमों को चौबीसों घंटे निगरानी और बचाव अभियान के लिए बॉर्डर एरिया में तैनात किया गया है।
देश के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदला (चक्रवात ‘अर्नब’ का असर)
एक तरफ जहां पूर्वोत्तर सीमा पर ग्लेशियर झील फटने (FLOOD) से बाढ़ का संकट पैदा हुआ, वहीं दूसरी ओर देश के मध्य और उत्तरी राज्यों में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर देखा गया। चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़कर कम दबाव के क्षेत्र में बदलने के बावजूद, इसका प्रभाव कई राज्यों में व्यापक रूप से पड़ा।
ओडिशा में बाढ़: चक्रवात के प्रभाव से हुई भारी बारिश के कारण ओडिशा के 3 जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, जिससे लगभग 62 हजार लोग प्रभावित और फंसे हुए हैं।
14 राज्यों में बारिश और आंधी: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर समेत 14 राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई।
रेड और ऑरेंज अलर्ट: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति को देखते हुए कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बारिश और ठंडी हवाओं के चलते दिन के तापमान में भारी गिरावट आई है, जिससे असमय ठंड का अहसास बढ़ गया है।



