दिल्ली में रैली-प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग: CTI ने पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र, कनॉट प्लेस-रामलीला मैदान में अनुमति नहीं देने की अपील
I.N.D.I.A. ब्लॉक की रैली से 11 हजार करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान होने का दावा; दिवाली से पहले 20 बड़े बाजारों की 2.5 लाख दुकानें बंद रहने की बात कही

दिल्ली। दिल्ली में राजनीतिक रैलियों, मार्च और धरना-प्रदर्शनों को लेकर व्यापारिक संगठनों ने विरोध जताया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक और सार्वजनिक इलाकों में ऐसे आयोजनों की अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन ने खास तौर पर कनॉट प्लेस, जंतर-मंतर, रामलीला मैदान, इंडिया गेट और राजघाट जैसे क्षेत्रों में रैली और प्रदर्शन पर रोक लगाने की अपील की है।
CTI का कहना है कि राजनीतिक आयोजनों के कारण बाजारों में कारोबार प्रभावित होता है। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रतिबंधों के चलते व्यापारियों, ग्राहकों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। संगठन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई I.N.D.I.A. ब्लॉक की रैली का उदाहरण देते हुए दावा किया है कि इस आयोजन से व्यापारियों को करीब 11 हजार करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान हुआ।
दिवाली से पहले रैली, 20 बड़े बाजारों में दुकानें बंद रहने का दावा
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ बड़ी रैली की थी। इसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में I.N.D.I.A. गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल हुए थे। रैली से पहले गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च भी निकाला था।
CTI और अन्य व्यापारी संगठनों के मुताबिक, रैली और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था के कारण दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में करीब 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। संगठन का दावा है कि दिवाली के ठीक पहले बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने से व्यापारियों को लगभग 11 हजार करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान उठाना पड़ा।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में सबसे ज्यादा कारोबार होता है। ऐसे समय में प्रमुख सड़कों पर मार्च, बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों से ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाते। इसका सीधा असर दुकानदारों के साथ ही छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों, होटल, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर भी पड़ता है।
राहुल गांधी को चार बार चिट्ठी लिख चुका है CTI
I.N.D.I.A. ब्लॉक की रैली से पहले भी CTI ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखे थे। संगठन ने उनसे रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली और मार्च के दौरान दिल्ली के कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी।
CTI का कहना था कि राजनीतिक दलों को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए ऐसे स्थानों और व्यवस्थाओं का चयन होना चाहिए, जिससे आम लोगों और व्यापारियों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो। संगठन ने बाजारों में सामान्य गतिविधियां बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था।
अब CTI ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर इस मामले में व्यापक कदम उठाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि राजधानी के प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में राजनीतिक रैलियों और मार्च को अनुमति न दी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।
राहुल गांधी ने दुकानें बंद कराने का आरोप BJP पर लगाया था
रैली के दौरान राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानें बंद मिलने को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए थे। उन्होंने मार्च के दौरान एक वीडियो जारी कर कहा था कि कनॉट प्लेस की दुकानें भाजपा ने जबरन बंद करवाई हैं। राहुल ने रैली और मार्च में शामिल होने आए लोगों से स्थानीय दुकानों से खरीदारी करने की अपील भी की थी।
उनका कहना था कि लोगों को समझना चाहिए कि बाजारों में कारोबार का नुकसान कौन करवा रहा है और इसके पीछे क्या वजह है। इस तरह रैली के दौरान बाजार बंद रहने का मुद्दा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा भी बन गया था।
मार्च में राहुल-अखिलेश समेत कई बड़े नेता हुए थे शामिल
1 नवंबर को हुई रैली में कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के नेता तेजस्वी यादव समेत विपक्षी गठबंधन के कई बड़े नेता शामिल हुए थे।
I.N.D.I.A. ब्लॉक का ‘चलो दिल्ली’ मार्च कनॉट प्लेस के मिंटो रोड जंक्शन से शुरू हुआ था। मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पैदल शामिल हुए, जबकि काफिले में कई गाड़ियां भी थीं। इसके बाद सभी नेता रामलीला मैदान पहुंचे, जहां SIR के विरोध में रैली आयोजित की गई।
अब इस आयोजन के बाद CTI ने पुलिस से भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए अनुमति नहीं देने की मांग की है। संगठन का तर्क है कि राजनीतिक गतिविधियों और व्यापारिक हितों के बीच संतुलन जरूरी है। हालांकि, 11 हजार करोड़ रुपए के नुकसान का आंकड़ा CTI और व्यापारी संगठनों का दावा है।



