40 साल पुरानी पेंशन व्यवस्था बंद होने पर बृजमोहन अग्रवाल ने CM साय से की बहाली की मांग

रायपुर। अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन बहाली का मुद्दा अब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंच गया है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर करीब 40 वर्षों से चली आ रही पेंशन और ग्रेज्युटी व्यवस्था को अचानक बंद किए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार कर बुजुर्ग पेंशनरों को राहत देने की मांग की है।
सांसद ने पत्र में बताया कि प्रदेश के अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले प्राध्यापकों और कर्मचारियों को करीब चार दशकों से पेंशन एवं सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ मिलते रहे हैं। विभागीय आदेश क्रमांक 38-2, दिनांक 12 अक्टूबर 2010 के तहत पांचवें वेतनमान के आधार पर यह व्यवस्था लागू थी। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के नए आदेश क्रमांक 18649/2026/38-2, दिनांक 1 सितंबर 2026 के जरिए इस व्यवस्था को अचानक प्रभाव से समाप्त कर दिया गया।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पेंशन व्यवस्था समाप्त होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिन कर्मचारियों ने अपना पूरा जीवन प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाया, उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखने का आग्रह किया। सांसद के अनुसार, वर्तमान में अधिकांश पेंशनरों की उम्र 70 से 90 वर्ष या उससे अधिक है। इस उम्र में रोजमर्रा के खर्च, आवश्यक जरूरतों और इलाज का मुख्य सहारा पेंशन ही है। ऐसे में वर्षों से मिल रही पेंशन अचानक बंद होने से वरिष्ठ नागरिकों के सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ गई हैं।
सांसद ने मुख्यमंत्री से उच्च शिक्षा विभाग के नए आदेश को तत्काल निरस्त करने या उस पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही पात्र सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पूर्व स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार पेंशन और ग्रेज्युटी का भुगतान जारी रखने का अनुरोध किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार के हस्तक्षेप से बुजुर्ग पेंशनरों को तत्काल राहत मिल सकती है और उन्हें जीवन के इस पड़ाव पर आर्थिक कठिनाइयों से बचाया जा सकता है। अब इस मामले में सरकार के अगले कदम पर नजर है।



