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TMC कार्यालय पर चला बुल्डोजर,

अवैध निर्माण के आरोप में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार अवैध कब्जों और विवादित निर्माणों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी अभियान के तहत अब पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाताल क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक स्थानीय पार्टी कार्यालय पर बुल्डोजर चलाया गया है। प्रशासन का दावा है कि यह कार्यालय निजी और सार्वजनिक जमीन पर कथित रूप से अवैध तरीके से निर्मित किया गया था।

विवादित जमीन पर बना था पार्टी कार्यालय

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, संबंधित जमीन की जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद पार्टी कार्यालय संचालकों को नोटिस जारी कर निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद प्रशासन ने पुलिस बल की मौजूदगी में बुल्डोजर कार्रवाई को अंजाम दिया। कार्रवाई के दौरान इलाके में तनाव का माहौल देखने को मिला, हालांकि पुलिस और प्रशासन की सतर्कता से स्थिति नियंत्रण में रही।

राज्य सरकार का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ यह अभियान बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कानून के सामने सभी समान हैं और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े होने के कारण किसी को विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

टिटागढ़ के TMC कार्यालय भी की गई कार्रवाई

इससे पहले उत्तर 24 परगना जिले के टिटागढ़ में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। वार्ड नंबर 12 स्थित एक TMC कार्यालय और उससे लगी कुछ दुकानों को प्रशासन ने अवैध कब्जे का हवाला देते हुए ध्वस्त कर दिया था। उस दौरान टिटागढ़ पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर मौजूद रही थी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उक्त कार्यालय TMC नेता इनाम खान से जुड़ा हुआ था, जिनकी गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण के आरोपों की जांच शुरू की थी।

चुनावों में हार के बाद TMC में बगावत शुरू

वहीं, विधानसभा चुनावों में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस आंतरिक राजनीतिक संकट से भी जूझती नजर आ रही है। पार्टी के कई सांसद और विधायक नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में बागी सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया ने दावा किया कि असंतुष्ट सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर स्वयं को वास्तविक TMC संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग करेंगे। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ 19 सांसद और 64 विधायक हैं, जबकि हाल के दिनों में छह अन्य विधायक भी उनके समर्थन में आए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर प्रशासनिक कार्रवाइयों का दबाव और दूसरी ओर पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष, तृणमूल कांग्रेस के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। हालांकि TMC नेतृत्व लगातार इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है।

 

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