छत्तीसगढ़ के प्रख्यात लोक कलाकार विक्रम यादव का 84 वर्ष की उम्र में निधन, डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि

रायपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ लोक कलाकार और अहीर परंपरा के पारंपरिक वाद्यों के सिद्धहस्त वादक विक्रम यादव का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश के लोककला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक देवेंद्र यादव और संस्कृति विशेषज्ञ अशोक तिवारी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
डॉ. रमन सिंह ने बताया लोककला जगत की अपूरणीय क्षति
डॉ. रमन सिंह ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि राजनांदगांव जिले के ग्राम खैरा निवासी प्रख्यात बीन एवं बाँस वादक और तुलसी सम्मान से सम्मानित विक्रम यादव का निधन प्रदेश की लोककला के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को दुख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि विक्रम यादव ने छत्तीसगढ़ की लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन से प्रदेश की लोककला और सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
विधायक देवेंद्र यादव ने जताया दुख
विधायक देवेंद्र यादव ने भी विक्रम यादव के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि उनके जाने से प्रदेश की कला और संस्कृति जगत को बड़ी क्षति हुई है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिजनों व प्रशंसकों को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
अशोक तिवारी ने साझा कीं यादें
संस्कृति विशेषज्ञ अशोक तिवारी ने विक्रम यादव के निधन को छत्तीसगढ़ की लोक संगीत परंपरा के लिए बड़ी क्षति बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि करीब दो दशक पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में कार्यरत रहने के दौरान मैसूर केंद्र में ‘अनंत यात्रा’ कार्यक्रम श्रृंखला के तहत बस्तर बैंड की प्रस्तुतियां आयोजित की गई थीं।
उन कार्यक्रमों में विक्रम यादव के वादन ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया था। बाँसुरी, बाँस और नगडेवन जैसे पारंपरिक वाद्यों पर उनकी पकड़ और छत्तीसगढ़ी लोकधुनों को जीवंत करने की कला अद्भुत थी। अशोक तिवारी के मुताबिक, उनके वादन में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की आत्मा झलकती थी।
उन्होंने यह भी याद किया कि विक्रम यादव को प्रतिष्ठित ‘तुलसी सम्मान’ से सम्मानित किया गया था और वे उस सम्मान की निर्णायक मंडली के सदस्य थे। उन्होंने इसे अपने लिए गौरव का विषय बताया।
पीढ़ियों तक याद किया जाएगा योगदान
अशोक तिवारी ने कहा कि विक्रम यादव जैसे कलाकार पीढ़ियों से चली आ रही लोक परंपराओं के संवाहक होते हैं। उनके वाद्य भले ही मौन हो गए हों, लेकिन उनकी कला, लोकधुनें और स्मृतियां हमेशा जीवित रहेंगी।
विक्रम यादव का योगदान छत्तीसगढ़ की लोकसंगीत परंपरा में लंबे समय तक याद किया जाएगा।



