ममता बनर्जी की सुरक्षा में बदलाव पर सियासी घमासान, TMC ने सरकार पर लगाया बदले की राजनीति का आरोप

पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में हुए बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी के लंबे समय से तैनात निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को अचानक हटाना राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।
जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात पांच पीएसओ को देर रात प्रशासनिक आदेश के तहत उनके मूल यूनिट में वापस भेज दिया गया। उनकी जगह चार नए पीएसओ नियुक्त किए गए, लेकिन ममता बनर्जी ने नए अधिकारियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बताया जा रहा है कि कुसुम द्विवेदी और स्वरूप गोस्वामी नामक अधिकारी लंबे समय से उनकी सुरक्षा टीम का हिस्सा रहे हैं और उन्हें ममता का करीबी माना जाता है।
टीएमसी ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह फैसला प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक है। पार्टी ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री को अलग-थलग करने और उनकी सुरक्षा को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, ममता बनर्जी की Z+ श्रेणी की सुरक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्हें केंद्र सरकार की ओर से Z+ सुरक्षा प्राप्त है, जिसके तहत लगभग 38 सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद उनके आवास के आसपास तैनात अतिरिक्त राज्य पुलिस बल और बैरिकेडिंग पहले ही हटा दी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, राज्य पुलिस का कहना है कि यह नियमित प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा है और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत समय-समय पर ऐसे बदलाव किए जाते हैं। लेकिन टीएमसी इसे राजनीतिक प्रतिशोध का मामला बता रही है।
फिलहाल, सुरक्षा अधिकारियों के बदलाव को लेकर विवाद जारी है और इस मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

