चीन की नई चाल: ताइवान के पूर्वी तट पर कोस्ट गार्ड की गश्त क्यों बढ़ी? जानिए ग्रे-जोन वॉरफेयर की पूरी रणनीति

अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पश्चिमी देशों की चेतावनियों के बावजूद चीन ने एक बार फिर ताइवान के पूर्वी तट पर अपने कोस्ट गार्ड के जहाजों की गश्त बढ़ा दी है। बीते एक महीने में यह दूसरी बार है जब चीन ने इस इलाके में ऐसी कार्रवाई की है। बीजिंग का दावा है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में कानून लागू करने के लिए गश्त कर रहा है, जबकि ताइवान इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए कड़ी आपत्ति जता चुका है।
ताइवान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि चीनी जहाज उसके जलक्षेत्र में घुसपैठ कर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे तो उन्हें खदेड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही ताइवानी प्रशासन ने अपने जहाजों को निर्देश दिया है कि यदि चीनी कोस्ट गार्ड निरीक्षण के नाम पर जहाजों पर चढ़ने की कोशिश करे तो उसका विरोध किया जाए।
एक महीने में दूसरी बार बढ़ा तनाव
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाई हो। जून में भी चीन ने इसी तरह का अभियान चलाया था। उस समय बीजिंग ने इसे जापान और फिलीपींस के बीच समुद्री सीमाओं पर शुरू हुई बातचीत की प्रतिक्रिया बताया था। चीन का आरोप है कि इन चर्चाओं में उन समुद्री क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है, जिन पर वह अपना दावा करता है।
क्यों अहम है ताइवान का पूर्वी तट?
ताइवान का पूर्वी तट सीधे प्रशांत महासागर की ओर खुलता है और लंबे समय से इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्र माना जाता रहा है। चीन की अधिकांश सैन्य गतिविधियां ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) यानी पश्चिमी तट के आसपास केंद्रित रही हैं।
अब पूर्वी तट पर गश्त बढ़ाकर चीन यह संकेत दे रहा है कि वह ताइवान को चारों ओर से घेरने की क्षमता विकसित कर रहा है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, संकट की स्थिति में इसका उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से ताइवान तक पहुंचने वाली सैन्य और रसद सहायता को बाधित करना हो सकता है।
क्या है चीन की ग्रे-जोन वॉरफेयर रणनीति?
चीन ने इस अभियान में अपनी नौसेना के बजाय कोस्ट गार्ड का इस्तेमाल किया है। इसे सैन्य रणनीति की भाषा में ग्रे-जोन वॉरफेयर कहा जाता है।
इस रणनीति का मतलब है बिना औपचारिक युद्ध छेड़े और बिना सीधे सैन्य संघर्ष के विरोधी देश पर लगातार दबाव बनाना। इसमें ऐसे कदम उठाए जाते हैं जो युद्ध की कानूनी सीमा से नीचे रहते हैं, लेकिन धीरे-धीरे रणनीतिक बढ़त दिलाते हैं।
चीन किन तरीकों से दबाव बनाता है?
- सलामी स्लाइसिंग रणनीति: छोटे-छोटे कदमों के जरिए धीरे-धीरे किसी क्षेत्र पर अपना प्रभाव बढ़ाना।
- मछली पकड़ने वाली नावों का इस्तेमाल: सामान्य दिखने वाली नौकाओं के जरिए समुद्री दावों को मजबूत करना।
- चारों ओर से घेराबंदी: कोस्ट गार्ड और अन्य जहाजों के माध्यम से किसी क्षेत्र तक पहुंच सीमित करना।
- बिना गोली चलाए दबाव: पानी की तेज बौछार, लेजर लाइट या जहाजों को टक्कर मारने जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर विरोधी पर दबाव बनाना।
नौसेना की जगह कोस्ट गार्ड क्यों?
कोस्ट गार्ड का इस्तेमाल करने से चीन सीधे सैन्य टकराव से बचा रहता है। इससे वह अपने दावे भी मजबूत करता है और ऐसी स्थिति भी नहीं बनने देता जिसे औपचारिक युद्ध माना जाए। यही वजह है कि इस रणनीति को ग्रे-जोन वॉरफेयर कहा जाता है।
क्यों चुनौतीपूर्ण है यह रणनीति?
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश पर सशस्त्र हमला होने पर ही दूसरे देश सैन्य हस्तक्षेप का आधार बना सकते हैं। चीन अपनी गतिविधियों को इस सीमा से नीचे रखता है, जिससे विरोधी देशों के लिए सीधे सैन्य जवाब देना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि ग्रे-जोन रणनीति को आधुनिक भू-राजनीति की सबसे प्रभावी और जटिल रणनीतियों में से एक माना जाता है।

