धमतरी में प्रार्थना सभा को लेकर विवाद, दो पक्ष आमने-सामने; हाथापाई के बाद भारी पुलिस बल तैनात

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी में धर्मांतरण के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है। टिकरापारा इलाके में एक मकान में आयोजित प्रार्थना सभा को लेकर हिंदू जागरण मंच और ईसाई समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस के बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।
प्रार्थना सभा को लेकर विवाद
जानकारी के मुताबिक, टिकरापारा मोहल्ले में एक मकान के अंदर प्रार्थना सभा आयोजित की जा रही थी। हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सभा में हिंदू लोगों को बहला-फुसलाकर लाया जा रहा था। मंच का दावा है कि कलेक्ट्रेट में हुई बैठक के दौरान यह सहमति बनी थी कि प्रार्थना सभा में गैर-ईसाई लोगों की भागीदारी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही होगी।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रविवार को इस कथित सहमति का पालन नहीं किया गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।
दोनों पक्षों में हुई तीखी बहस
मौके पर ईसाई समुदाय के लोग भी जुट गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई और विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और प्रार्थना सभा में जाने वाले लोगों को NH-30 के पास रोक दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए SDM, तहसीलदार समेत बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। भाजपा युवा मोर्चा के नेता और नगर निगम महापौर भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
भाजपा ने हिंदू जागरण मंच का समर्थन किया
भाजपा नेताओं ने हिंदू जागरण मंच के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण किए जाने के आरोपों की जांच होनी चाहिए। वहीं, महापौर ने मामले को गंभीर बताते हुए बैठक के जरिए विवाद को शांत कराने की बात कही।
दूसरी ओर, ईसाई समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रार्थना सभा में आने पर कोई रोक नहीं है और कोई भी व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की
फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। विवाद के बाद धमतरी में धर्मांतरण और प्रार्थना सभाओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी तेज हो गई है।
हालांकि, प्रार्थना सभा में धर्मांतरण किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। अब सवाल यह है कि कलेक्ट्रेट में हुई कथित सहमति की शर्तों का पालन हुआ था या नहीं और पूरे मामले में प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।



