DBT से सरकार को 5.14 लाख करोड़ रुपये की बचत, FY25 में ही रुके 83 हजार करोड़ रुपये के लीकेज

केंद्र सरकार के अनुसार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी लाभार्थियों को हटाने में बड़ी भूमिका निभाई है. वित्त वर्ष 2025 में DBT के जरिए 83,064 करोड़ रुपये की लीकेज रोकने में सफलता मिली, जिससे 2015 से अब तक कुल बचत बढ़कर 5.14 लाख करोड़ रुपये हो गई है.
सरकार का कहना है कि इस बचत से योग्य लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाया जा सका है और सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है.
राशन कार्ड और मनरेगा में सबसे ज्यादा बचत
वित्त वर्ष 2025 में फर्जी, डुप्लीकेट और अस्तित्वहीन राशन कार्ड हटाने से 63,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई. वहीं, मनरेगा (अब G-RAM-G) में नकली और डुप्लीकेट जॉब कार्ड हटाने से 16,829 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत दर्ज की गई.
2015 से अब तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से 6.36 करोड़ फर्जी राशन कार्ड हटाए गए, जिससे कुल 3.13 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई. यह DBT से हुई कुल बचत का लगभग 61 प्रतिशत है.
PM-KISAN, LPG और उर्वरक सब्सिडी में भी बड़ी बचत
सरकार ने PM-KISAN योजना से 2.11 करोड़ अयोग्य लाभार्थियों को हटाकर 22,106 करोड़ रुपये बचाए. वहीं, LPG सब्सिडी में फर्जी और अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर 74,031 करोड़ रुपये की बचत हुई.
उर्वरक क्षेत्र में भी रिटेल स्तर पर बिक्री में अनियमितताओं पर रोक लगाकर 18,700 करोड़ रुपये की बचत का दावा किया गया है.
DBT के जरिए रिकॉर्ड ट्रांसफर
वित्त वर्ष 2026 में 328 योजनाओं के तहत DBT ट्रांसफर 7.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. 2015 से अब तक सरकार लाभार्थियों को नकद सहायता, खाद्यान्न और अन्य सब्सिडी के रूप में करीब 51.5 लाख करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर कर चुकी है.
सरकार का मानना है कि DBT के विस्तार, समय पर फंड जारी करने और फर्जी लाभार्थियों को हटाने से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ी है, साथ ही पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) बढ़ाने और वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने में भी मदद मिली है.

