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Chhattisgarh

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द पदोन्नति से नहीं मिलेगी सीनियरिटी

प्रधानपाठकों की याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने शासन का फैसला माना सही

बिलासपुर | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति(promotion) और वरिष्ठता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की प्रारंभिक पदोन्नति को अनियमितताओं के कारण निरस्त कर दिया गया है, तो बाद में उसी पद पर दोबारा पदोन्नति मिलने पर उसे पुराने निरस्त आदेश की तारीख से वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता।

यह फैसला न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने सूरजपुर जिले के पांच प्रधानपाठकों द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए राज्य शासन के निर्णय को वैधानिक और उचित माना।मामले के अनुसार, याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2012 में पहली बार प्रधानपाठक के पद पर पदोन्नति दी गई थी और उन्होंने पदभार भी ग्रहण कर लिया था। हालांकि, पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितताओं और विसंगतियों की शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच कराई गई। जांच में त्रुटियां पाए जाने पर सितंबर 2012 में जारी पदोन्नति आदेश को निरस्त कर दिया गया।

इसके बाद विभाग ने पदोन्नति प्रक्रिया को दोबारा पूरा किया और वर्ष 2013 में संबंधित कर्मचारियों को फिर से प्रधानपाठक पद पर पदोन्नत किया। बाद में कर्मचारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए मांग की कि उन्हें वर्ष 2012 की मूल पदोन्नति तिथि से वरिष्ठता का लाभ दिया जाए।राज्य सरकार की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि चूंकि वर्ष 2012 का पदोन्नति(promotion) आदेश विधिवत रूप से निरस्त किया जा चुका था, इसलिए उसके आधार पर किसी प्रकार की वरिष्ठता का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जब मूल पदोन्नति(promotion) आदेश ही कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है, तब उस आदेश की तारीख से वरिष्ठता का लाभ देने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ताओं का दावा खारिज करने का निर्णय नियमों और कानून के अनुरूप है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति, वरिष्ठता और सेवा संबंधी विवादों में एक महत्वपूर्ण संदर्भ के रूप में देखा जाएगा। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि निरस्त की जा चुकी पदोन्नति के आधार पर वरिष्ठता का दावा नहीं किया जा सकता, भले ही बाद में कर्मचारी को उसी पद पर पुनः पदोन्नति मिल गई हो।

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