अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती से बैंक जमा तक की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, CCTV निगरानी में होता है हर चरण

अयोध्या: राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और दानपात्रों में नकद राशि, सिक्के, सोना-चांदी व अन्य बहुमूल्य वस्तुएं अर्पित करते हैं। मंदिर ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती और बैंक खाते में जमा करने की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है।
मंदिर परिसर में करीब 40 दानपात्र स्थापित हैं। सामान्य दिनों में प्रतिदिन 8 से 13 लाख रुपये तक का चढ़ावा प्राप्त होता है, जबकि त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह राशि 50 से 60 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
दानपात्र भरने के बाद उन्हें ट्रस्ट और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में खोला जाता है। इसके बाद चढ़ावे को सुरक्षित कंटेनरों में रखकर विशेष ट्रॉलियों के माध्यम से गणना केंद्र तक पहुंचाया जाता है। पूरी प्रक्रिया CCTV कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है।
दो शिफ्टों में होती है गिनती
चढ़ावे की गणना प्रतिदिन दो शिफ्टों में की जाती है-
- सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक
- दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक
हर शिफ्ट में लगभग 20 कर्मचारी तैनात रहते हैं। कर्मचारियों के लिए सख्त नियम लागू हैं, जिनमें जेब वाले कपड़े पहनने पर रोक और नियंत्रित आवाजाही शामिल है।
नकदी, सिक्के और आभूषणों की अलग-अलग गिनती
दान में प्राप्त सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है, जिनमें करेंसी नोट, सिक्के, सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी की गिनती निर्धारित काउंटरों पर की जाती है और पूरी प्रक्रिया पर बैंक तथा ट्रस्ट प्रतिनिधियों की निगरानी रहती है।
बैंक में जमा होती है राशि
गणना पूरी होने के बाद नकदी को सीलबंद कंटेनरों में रखकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा भेजा जाता है। बैंक स्तर पर सत्यापन के बाद राशि ट्रस्ट के खाते में जमा कर दी जाती है।
पूरी तरह डिजिटल है वित्तीय व्यवस्था
राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय प्रणाली पूरी तरह डिजिटल है। ट्रस्ट चेकबुक का उपयोग नहीं करता और सभी भुगतान सीधे बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से किए जाते हैं।
इस प्रकार श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित चढ़ावा कई स्तरों की निगरानी, गणना, सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया से गुजरने के बाद ट्रस्ट के खाते में पहुंचता है।

